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देखिए कैसे एक आदिवासी महिला रेडियो से बदलाव का दीपक जला रही है

tsgt-superman

May 10, 2016

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रामवती एक आदिवासी महिला हैं जो मध्य प्रदेश के पतारा गाँव की निवासी हैं। एक ऐसी जगह महिलाओं को बस घर का कामकाज करने वाली वस्तु समझा जाता है, ऐसी जगह पर रामवती ने महिला सशक्तिकरण और उनके उत्थान के लिए एक ऐसी वास्तु का उपयोग किया जो अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है, वो वास्तु एक मामूली सा रेडियो है।

६ वर्षों से भी ज़्यादा रेडियो धड़कन से जुड़ कर वो ५ गाँव में लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ा रही हैं। रेडियो पर वो अपनी खड़ी भाषा का प्रयोग करती हैं जो लोगों को समझ में भी आती है और पसंद भी। वो ज़मीनी स्तर पर भी जा कर रिपोर्टिंग करती हैं, गाँव वालों से मिलती हैं, उनके कामकाज, रहन-सहन और जीविका की समस्याएं सुनती हैं।

एक मुस्कान के साथ वो अपने कार्यक्रम की शुरुवात करती हैं। “मेरे श्रोताओं, मेरे भाईयों और मेरी बहनों।” ये उनके कार्यक्रम के शुरुआती बोल होते हैं। उनकी आशावादी सोच और उत्साह उनके चेहरे पर साफ झलकता है और धीरे-धीरे यही उत्साह वो गाँव वालों में भी भर रही हैं।

रेडियो से उनके समाज के लोगों का बहुत कल्याण हुआ है। रामवती कहती हैं कि उनके कार्यक्रमों से लोग शिक्षा, स्वास्थ और समाज को लेकर काफी जागरूक हुए हैं। रामवती खुद इस बदलाव को अपने जीवन में अनुभव करती हैं, उनका कहना है कि रेडियो ने उनका जीवन बदल दिया है। “मैं भी मेरी सारी बहनों की तरह घूँघट में कुढ़ कर और दब कर रह जाती पर रेडियो की वजह से लोग मुझे जानने लगे हैं, पहचानने लगे हैं। मैं जहाँ जाती हूँ तो लोग कहते हैं रेडियो वाली आ गई” रामवती हँस कर कहती हैं।

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