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मेरी कहानी: तुम जैसी मोटी लड़कियों को वरना कौन घाँस डालता है, फ़िज़ूल का एटीट्यूड दिखाने से अच्छा है चुपचाप अपना नंबर दे दो

ashu

October 14, 2016

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“हम एक ऐसे युग में जी रहे हैं जहाँ महिलाऐं सिर्फ़ अपने शरीर के लिए जानी जाती हैं, टीवी हो या अख़बार, महिलाओं के शरीर पर ही सारा ध्यान केंद्रित है, उनके फिगर की ही चर्चा है। यह बड़ी दुखद बात है कि यह अब इतना प्रचलित हो चुकी है कि हमें यह सामान्य लगती है, किसी भी लड़की के शरीर का मज़ाक उड़ाया जाता है तो यह आम बात समझी जाती है। बॉडी शेमिंग अब हमारे समाज की एक हकीकत है, जिसे सबने आँखें बंद करके अपना लिया है।

मैं 19 साल की एक लड़की हूँ और बॉडी शेमिंग का दंश झेल चुकी हूँ। आंकड़े बताते हैं कि भारत में लगभग एक तिहाई लड़कियां मोटापे से डरती हैं, तब भी जबकि वह मोटी नहीं होती हैं। वो डाइटिंग करती हैं, तरह बेतरह के नुस्खे अपनाती हैं, सिर्फ़ इसलिए कि वो मोटी ना हो जाएँ। मैं झूठ नहीं बोलूंगी, मैंने भी बहुत डाइटिंग की, ना चाहते हुए भी मैंने अपना वज़न कम किया, अपने लिए नहीं बल्कि इस समाज के लिए, इसके तानों और मज़ाक से बचने के लिए। पर एक दिन मुझे एहसास हुआ कि आख़िर मैं ये सब कर क्यूँ रही हूँ, क्यूँ मैं दूसरों की वजह से अपने शरीर को बदल रही हूँ। उस दिन से मैंने अपने शरीर के बारे में सोचना बंद कर दिया, मैं जैसी भी हूँ, खुश हूँ, मुझे दूसरों का सर्टिफिकेट नहीं चाहिए। कहानी आगे बढ़ाते हुए मैं आपको मेरे साथ हुई बॉडी शेमिंग की एक घटना बताती हूँ।

कल संडे की सुबह बड़ी अच्छी थी कि तभी मेरा मोबाइल बजा, देखा तो फेसबुक पर मुझे किसी ने गुड मॉर्निंग का मैसेज भेजा था। मैंने इस लड़के से पिछले 2 साल में बहुत कम बात की थी पर उस दिन मैंने उसे उत्तर देने की सोची। कुछ देर बात करने के बाद वो मेरा फ़ोन नंबर मांगने लगा, मैंने विनम्रता से मना कर दिया। मैंने उससे कहा कि मैंने शिष्टाचार से उससे थोड़ी बातें कर ली इसका मतलब ये नहीं कि मैं अपना नंबर बांटते फिरूँगी, जिसपर उसने बेशर्मी से पुछा कि क्या मैं लेस्बियन हूँ? मैं उसके सवाल पर हैरत में थी। उसने अपना नंबर मुझे भेज कर कहा कि इसपर मैसेज भेज दो, इसके बाद उसने जो कहा उसे सुनकर मुझे पता चला कि बॉडी शेमिंग की यह बिमारी होती क्या है।

उसने कहा, ”इतना भाव मत खाओ, हम दोनों एक दूसरे के लिए बिल्कुल सही हैं, मैं भी मोटा हूँ, तुम भी मोटी हो। तुम्हें तो मुझे थैंक्स कहना चाहिए कि मैं तुम्हें पसंद करता हूँ, तुम जैसी मोटी लड़कियों को वरना कौन घाँस डालता है। यह तुम्हारे लिए सुनहरा मौका है, फ़िज़ूल का एटीट्यूड दिखाने से अच्छा है चुपचाप अपना नंबर दे दो। तुम्हें तो मेरा शुक्रिया अदा करना चाहिए, तुम जैसी मोटी लड़कियों को कौन पूछता है, अपना नंबर देना मत भूलना मोटी लड़की, बाय,” इतना कहकर वो चला गया और मैं सोच नहीं पा रही थी कि मैं उसे क्या जवाब दूँ। उसने जो कहा शायद वो कहीं ना कहीं सच था पर मैंने उसे ब्लॉक करने से पहले उसे सबक सिखाना ज़रूरी समझा।

मैंने उसे एक लंबा मैसेज लिखकर कहा, ”मैं तुम्हें इसलिए नहीं ब्लॉक कर रही हूँ क्यूंकि तुम्हारी बातों का मुझे बुरा लगा, बल्कि इसलिए कि मुझे तुम्हारी सोच से घिन आती है। मुझे तुम्हारी मानसिक स्थिति पर दया आती है, लोगों के बारे में तुम्हारी राय बड़ी ही तुच्छ है, इसे बदल दो तो अच्छा होगा। मैं जैसी भी हूँ, अपने आप से प्यार करती हूँ, कोई व्यक्ति मुझपर तरस खाकर, मेरे मोटापे पर रहम करके प्यार करे, इससे भली तो मैं बिना प्यार के हूँ। तुम जैसे लोगों की वजह से समाज में लड़कियों का जीना हराम है।” इसके बाद मैंने उसे ब्लॉक कर दिया।

स्कूल से लेकर आजतक मैंने अपने शरीर को लेकर भद्दे मज़ाक और ताने ही सुने हैं, दूसरों से भी और कई बार खुद अपने परिवार में भी। लोग मुझसे कहते हैं कि मेरा पेट बाहर निकला है, या मेरी कमर हाथी जैसी है, मेरे स्तन दूसरी लड़कियों जैसे नहीं या मेरा फिगर उनके हिसाब से सही नहीं है। पहले मैं इन बातों को दिल पर लेती थी पर अब और नहीं। हाँ, कभी कभी दुख होता है पर अब मुझे फर्क नहीं पड़ता है कि कोई मेरे बारे में क्या सोच रहा है। कोई इंसान अपना शरीर स्वयं नहीं चुनता है, वो तो उस शरीर में पैदा होता है।

बॉडी शेमिंग की ये समस्या तब तक नहीं ख़त्म हो सकती जब तक लोग अपने शरीर को अपनाना ना सीख लें, आप पतले हो या मोटे हो, यह शरीर आपका है और इससे दूसरों को कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए। लड़की सिर्फ़ अपने फिगर के लये नहीं जानी जा सकती, उसकी अपनी एक पहचान है, उसकी अपनी एक ज़िन्दगी है। मैं अब लोगों द्वारा मज़ाक बनाए जाने पर दुखी नहीं होती हूँ बल्कि अब तो वो मुझे और ताकत देते हैं ताकि मैं इस समाजिक बीमारी के खिलाफ़ लड़ सकूँ।”

~Jahnabi Kalita द्वारा भेजी गई।

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