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यूपी के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी दी किसानों को कर्ज माफी

तर्कसंगत

June 13, 2017

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महाराष्ट्र में किसानों की हड़ताल के 11वें दिन सरकार ने किसानों का कर्ज माफ़ करने का ऐलान कर दिया है.

हड़ताल की शुरुआत में किसानों से बात न करने का ऐलान करने वाले मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने आख़िरकार हालात की गंभीरता को समझा और किसान नेताओं से वार्ता की.

हड़ताल का असर न सिर्फ़ अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था बल्कि प्रदेश में राजनीतिक समीकरण भी गड़बड़ा रहे थे.

रविवार को किसानों से वार्ता के बाद महाराष्ट्र सरकार ने छोटे किसानों को तुरंत कर्ज से राहत देने और जल्द ही दूध की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया.

समूचे महाराष्ट्र में किसान एक जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे. प्रदर्शनकारी किसानों ने शहरों को होने वाली फ़लों और सब्ज़ियों की आपूर्ति रोक दी थी.

किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है और उन्हें अपनी फ़सल के सही दाम नहीं मिल रहे हैं.

मशहूर पत्रकार पी साईंनाथ के मुताबिक बीते तीन सालों में एक और जहां लागत में बेतहाशा वृद्धि हुई है वहीं खेती से होने वाली आए या तो स्थिर हो गई है या कम हो गई है. फसलों की बंपर पैदावार के बावजूद किसानों की आय नहीं बढ़ी है.

लागत भी न निकल पाने की वजह से किसानों पर कर्ज बढ़ रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एक जनवरी से 31 मार्च 2017 के बीच कुल 639 किसानों ने आत्महत्या की है.

रविवार को किसानों के साथ बैठक के बाद महाराष्ट्र सरकार ने ऐलान किया कि किसानों के साथ समझौता हो गया है और सरकार किसानों का कर्ज माफ कर रही है.

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने मीडिया से कहा कि ये कर्जमाफी सभी किसानों पर लागू होगी न कि सिर्फ छोटे किसानों पर.

सरकार ये सुनिश्चित करेगी कि ज़रूरतमंद किसान संस्थानिक कर्ज के दायरे से बाहर न हों.

महाराष्ट्र में कुल 1.36 करोड़ किसान हैं जिन पर कुल 1.14 लाख करोड़ का कर्ज है. हालांकि सरकार का अनुमान है कि ये कर्जमाफ़ी करीब पैंतीस हज़ार करोड़ तक की ही होगी.

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि सरकार कर्जमाफ करने की कई तरह की शर्ते लागू कर देगी ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि सिर्फ़ वास्तविक ज़रूरतमंद किसानों का ही कर्ज माफ हो.

सरकार जो शर्ते लागू करेगी उनके तहत बड़े ओद्योगिक घरानों, नेताओं , बड़े पेशेवर किसानों को कर्ज माफ़ी का फ़ायदा नहीं मिल पाएगा.

मशहूर पत्रकार पी साईंनाथ का कहना है कि कर्ज माफी किसानों को राहत तो पहुंचाती है लेकिन ये किसानों की समस्या का समाधान नहीं है.

भारतीय रिज़र्व बैंक ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य कर्जमाफी करते रहे तो वित्तीय स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है.

रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल ने कर्ज माफी की तीखी आलोचना करते हुए समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा है कि इनसे सरकार का खर्च बढ़ता है, राजकोषीय घाटे बढ़ जाता है.

वहीं वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं जो कि राज्य किसानों का कर्ज माफ़ कर रहे हैं वो इसके लिए पैसा अपने संसाधनों से जुटाने की व्यवस्था करे.

महाराष्ट्र सरकार के कर्जमाफ़ी के फैसले ने राज्य में चल रहे किसान आंदोलन पर विराम लगा दिया है. यदि सरकार अपने सभी वादों पर खरी उतरती है तो हो सकता है ये आंदोलन ख़त्म ही हो जाए. इसी बीच किसानों का कर्ज माफ़ करने के आर्थिक पहलुओं पर बहस जारी है.

लेकिन कर्जमाफ़ी देश में चल रहे कृषि संकट का स्थायी समाधान नहीं है. वरिष्ठ पत्रकार पी साईंनाथ का मानना है कि सरकारी नीतियों के तहत जानबूझकर कृषि को किसानों के लिए घाटे का सौदा बनाया जा रहा है ताकि मजबूर किसान कृषि छोड़ दें और ये क्षेत्र भी कार्पोरेट के हाथों में आ जाए.

यदि ऐसा हुआ तो किसान अपनी ही ज़मीन में मज़दूर बनकर रह जाएंगे.

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