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डूब रहे कुल कर्ज का एक चौथाई सिर्फ़ बारह खातों पर

तर्कसंगत

June 14, 2017

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मंगलवार को रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने जानकारी दी है कि देश के कुल बैड लोन (डुब रहे कर्ज) का एक चौथाई सिर्फ़ बारह खातों पर है. केंद्रीय बैंक की आंतरिक सलाह समिति ने इन खातों की जांच की है और दिवालियापन बैंक कोड के तहत इनका समाधान करने की सिफारिश की है.

हालांकि आरबीआई ने अभी इन खाताधारकों के बारे में जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

भारत में डूब रहे कर्जों की समस्या

बीते तीन सालों से, आरबीआई देश में बैड लोन की समस्या का समाधान करने के लिए संघर्ष कर रही है मई 2016 में आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर रघुराम राजन ने परिसंपत्ति गुणवत्ता समीक्षा शुरू की थी.

इसके तहत आरबीआई ने बैंकों से डूब रहे कर्ज़ों या ख़राब स्थिति में चल रहे कर्जों के बारे में जानखडकारियां देने के लिए कहा था.

इस समीक्षा में सामने आया था-

1. सभावित डूब रहे कर्जों की सूची

2. रघुराम राजन ने स्वीकार किया था कि देश के सरकारी बैंकों की आय की हालत ठीक नहीं है.

3. ख़राब आंकड़ों की वजह से सरकारी बैंकों का बाज़ार पूंजीकरण गिर गया था.

4. आरबीआई ने बैंकों को 2017 तक अपनी बैलेंसशीट स्पष्ट करने के लिए कहा था.

अब मंगलवार को ये बताया गया है कि देश भर में बैंकों के डूब रहे कर्जों में से एक चौथाई के लिए सिर्फ़ बारह खाते ही ज़िम्मेदार हैं. मार्च 2017 तक भारत में इन डूब रहे कर्जों की मात्रा 7.11 लाख करोड़ तक है. इसका मतलब ये है कि ये बारह खाते ही 1.78 लाख करोड़ रुपए के डूब रहे कर्जों के लिए ज़िम्मेदार हैं.

क़ानून में संशोधन

इन डूब रहे कर्जों और गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) की समस्या से निबटने के लिए भारत सरकार ने 3 मई 2017 को बैंकिंग रेग्युलेशन एक्ट 1949 में संशोधन किए थे. सरकार ने डूब रहे कर्जों की समस्या के समाधान के लिए आरबीआई को नई शक्तियां दी थीं.

मंगलवार को हुई अपनी पहली बैठक में आरबीआई की आंतरिक सलाहकार समिति ने ऐसे 500 ख़राब खातों पर चर्चा की जिन्हें दीवालियापन कोड के तहत समाधान के लिए भेजा जा सकता है .

इस समिति में ज़्यादातर सदस्य आरबीआई के ही बोर्ड मेंबर हैं. अब रिज़र्ब बैंक समिति की सिफ़ारिशों के बाद बैंकों से इन खातों को आईबीसी (इनसालवेंसी एंड बैंकरप्ट्सी कोड) दीवालिया घोषित करने के लिए कह सकता है.

नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) भी इन मामलों की प्राथमिकता से सुनवाई करेगा. आईबीसी के तहत दायर मामलों की सुनवाई के लिए एनसीएलटी ही सर्वोच्च प्राधिकरण है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को बताया है कि अब तक 81 मामले एनसीएलटी के समक्ष भेजे जा चुके हैं.

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