मेरी कहानी

मेरी कहानी :  मैं बेघर और टूट चुका था, 3 महीने तक मैं सड़कों पर नहाया

तर्कसंगत

July 3, 2017

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मैं जब रत्नागिरी में था तो दसवीं में फेल हो गया था, लेकिन मेरे सपने बड़े थे. मेरा परिवार एक छोटे से समुदाय का हिस्सा था, जहां हम नाई का व्यवसाय किया करते थे. मुझे पता था कि मेरा भी यही भविष्य होगा लेकिन मैं सिर्फ साधारण तरीके से बाल काटना या दाढ़ी बनाना नहीं चाहता था. मैं फ़िल्मी दुनिया में एक पेशेवर हेयर ड्रेसर और हेयर स्टाइलिस्ट बनना चाहता था.

मैं 10 साल पहले अपने रिश्तेदार की शादी में पहृली बार मुंबई गया था. अगर सच कहुं तो शादी एक बहाना था ये मेरा दिल जानता था, कि मैं किसी और वजह से मुंबई आया था. यहां मैं अपने सपने साकार करने और कुछ खास करने के जज्बे से यहां आया था. शादी होने के बाद मैं यहीं रुक गया और दाहिसार के एक पार्लर में काम करने लगा. मेरे रिश्तेदार घर पर मेरी मजाक बनाते और कहते की एक बदसुरत लड़का जिसे हिंदी भी ठीक से बोलनी नहीं आती वो इस शहर में कभी भी नहीं टीक पायेगा. हां मैं बहुत बड़ा करने की नहीं सोचता था लेकिन मैने ठान लिया की मुझे बहुत बेहतरीन करना है. मैं बहुत लगन और शिद्दत के साथ काम करता था, पैसे के लिए नहीं लेकिन तजुर्बे के लिए. मैं बिल्कुल भी पैसे नहीं कमाता था और मुझे याद है कि करीब 3 महीने तक मैं सड़कों पर नहाया क्योंकि मैं सामर्थयवान नहीं था. भले ही मैं बगैर घर और पैसे के बिल्कुल टूट चुका था, लेकिन दिल के किसी कोने में मुझे इस बात की उम्मीद थी कि कभी न कभी तो मेरा दिन आयेगा और मैं किसी अच्छी जगह पर रहुंगा.

समय बीतता गया, तभी किसी बड़े सैलून से मुझे इंटरव्यु की कॉल आई. मैं अपने कपड़े देखकर यही सोचता रहा की वो किसी ऐसे व्यक्ति को क्यूं रखे जिसके पास ढंग के कपड़े तक नहीं लेकिन शुक्र है कि उन्होंने मेरे लुक पर ध्यान नहीं दिया और मुझे काम पर रख लिया. मेरे बॉस और साथ काम करने वाले लोग बहुत ही अच्छे थे, उन्होने मुझे बहुत कुछ सिखाया, हिंदी से लेकर हेयर स्टाइलिंग तक.

मुझे कुछ बड़ा करने की इतनी ललक थी की मैंने खुद से सैलून में आये विदेशी ग्राहकों को देखकर और सुनकर इंग्लिश सीख ली. मैं उनके हाथ के ईशारे और मुंह से निकले शब्दों की पहचानकर इंग्लिश बोलना सीख गया. शुरूआत में मुझे ये तक पता नहीं था की ‘Hi’ और ‘How do you do?’ का कैसे जवाब देना है, लेकिन समय, अभ्यास और कुछ लोगों की मदद से आज मैं फर्राटेदार अंग्रेजी बोल लेता हूं.

आज मैं 33 साल का हो चुका हूं और जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो गौरवानवित मबसूस करता हूं. 11 साल की उम्र में चाचा से बाल काटने का हुनर सिखने से लेकर एक प्रोफेशनल की तरह य़ुरोप में शादी में जाना, फिल्मी दुनिया में काम करने का सपना लेकर असल में सोनम कपूरअभय दोओल के साथ आयशा मूवी में काम करना, सड़क पर नहाने से लेकर खुद के अपार्टमेंट तक, बिना पैसे के मुंबई आना और आज 4 भाईयों समेत मातापिता को पैसे भेजना, बिना किसी नाम और पहचान से लेकर वोग जैसी बड़ी मैगेज़ीन में चित्रित होना.. आज मेरे सारे सपने साकार हो गये क्योंकि मैने खुद पर इतना भरोसा किया कि दुनिया के पास मुझपर यकीन करने के सिवा दूसरा कोई रास्ता ही नहीं बचा.

  • सुहास मोहिते

Courtesy: Humans of Bombay

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