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एक गांव ऐसा जहां सारी सुख-सुविधाओं के बाद भी नही है शौचालय.

तर्कसंगत

July 5, 2017

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आज के समय में भी लोगों के ज़हन में अंधविश्वास किस कदर हावी हैं इसका उदाहरण देखने को मिला पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर नवादा जिले के गाज़ीपुर गांव में जहां करीब ३00 घर हैं इन घरों में एसी है, गीजर है, गांव में पक्के मकान हैं, लेकिन किसी भी घऱ में शैचालय नहीं है. इस गांव के लोग आज भी खुले में शौच को जाते हैं.

हर तरह से सक्षम और समृद्ध होने के बाद भी गाजीपुर गांव के घरों में शौचालय न बनवाने का कारण है अंधविश्वास और गांव के लोगों के भीतर इस अंधविश्वास का जन्म 1984 में हुआ जब एक बड़े किसान सिद्धेश्वर सिंह के बेटे की तब मौत हो गई जब वो घर में टॉयलेट का निर्माण करा रहे थे. कुछ समय बाद एक और गांव वाले रामप्रवेश शर्मा के बेटे की 1996 में घर में टॉयलेट निर्माण के समय मौत हो गई थी. इसके बाद से ही गांव वालों ने घरों में शौचालय ना बनवाने का फैसला लिया. वहीं, यहां के प्राथमिक विद्यालय में शौचालय तो बना है लेकिन इसका इस्तेमाल बच्चे नहीं करते सिर्फ बाहर से आने वाले टीचर करते हैं.

पीएम नरेंद्र मोदी के महत्वकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान के तहत जहां गांवगांव में शौचालय बनवाए जा रहे हैं वहीं यहां खुले में शौच की जाती है.

ऐसा नहीं है कि गांव वालों के इस फैसले के खिलाफ किसी ने भी जाने की कोशिश नहीं की। 2009 में कुमार अरविंद नाम के युवक ने जब टॉयलेट का निर्माण शुरू किया था तो एक एक्सिडेंट में उसकी कमर और पांव में चोट आई थी. इतना ही नहीं, सरकारी प्राइमरी स्कूल में बने टॉयलेट का इस्तेमाल करने के एक दिन बाद ही मुंद्रिका सिंह की मौत हो गई थी. टॉयलेट तभी से बेकार पड़ा है. हैरानी की बात तो यह है कि इस गांव में साफसफाई को लेकर दौरा करने आए स्थानीय ब्लॉक विकास अधिकारी की थोड़े समय बाद ही एक्सिडेंट में मौत हो गई.

इस घटना के बाद से गांव के लोगों ने भयभीत होकर शौचालय बनवाना छोड़ दिया जिसके कारण आज तक इस गांव के लोग खुले में ही शौच करने को मजबूर हैं. गांव के एक स्कूल में शौचालय है मगर इसी डर के कारण लोग उस शौचालय का भी इस्तेमाल नहीं करते हैं.

गांव के एक भी घर में शौचालय नहीं होने के कारण इस गांव में अनेकों प्रकार की समस्या से लोगों को रूबरू होना पड़ता है. सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस गांव में लोगों के घरों में बाहर से शादी के रिश्ते होने में काफी परेशानियां होती हैं.

हाल ही में एक ग्रामीण के यहां रिश्ता सिर्फ इस कारण तय नहीं हुआ क्योंकि किसी दूसरे की बेटी जब इस गांव में शादी के बाद आयेगी तो उसे शौच के लिए बाहर खेतों में जाना पड़ेगा. इस गांव के हर घर में अन्य तरह की कई सुविधाएं हैं मगर एक शौचालय नहीं होने से लोगों को बहुत प्रकार की समस्या उत्पन्न हो रही है.

शौचालय की समस्या के कारण इस गांव के युवा भी अब गांव से परहेज करने लगे हैं। बाहर पढ़ने और नौकरी करने वाले लोग इस समस्या के कारण गांव में बस मेहमान की तरह आते हैं और चले जाते हैं. लगभग 300 घरों में दो हजार लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं. अब इनकी सरकार से गुहार है कि सामूहिक रूप से कुछ ऐसा कदम उठाया जाए कि लोग इस भय और अंधविश्वास से बाहर आ सकें और हर घर में शौचालय हो.

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