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अमरनाथ यात्रा : पहले से जारी था हमले का अलर्ट फिर भी 2 आतंकी लगा गए सुरक्षा में सेंध

तर्कसंगत

July 10, 2017

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श्रीनगर के अनंतनाग में आतंकियों ने अब तक की सबसे कायराना करतूत को अंजाम दिया है. आतंकियों ने निहत्थे अमरनाथ यात्रियों पर हमला किया जिसमें 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और कई घायल हैं .

अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी हमले की  संभावना हमेशा से रहती है. इस बार तो यात्रा के लिए सुरक्षाबलों की संख्या पिछले साल से बढ़ाकर लगभग दोगुनी की गई थी फिर भी बाइक पर आए दो आतंकियों ने इस हमले को अंजाम दिया.

इस साल भी अमरनाथ यात्रा के दौरान भक्तों पर आतंकी हमले की खबर थी और यात्रा शुरू होने से पहले ही हमले का खुफिया अलर्ट जारी किया गया था. जिसके बाद अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा और पुख्ता की गई थी.

15 जून को कश्मीर में एक के बाद एक 8 हमलों के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने अमरनाथ यात्रा के लिए रेड अलर्ट जारी किया था. 26 जून को केंद्रीय गृह मंत्रालय को खुफिया इनपुट मिला था कि आतंकियों को उनके आकाओं से अमरनाथ यात्रियों और पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाने की हिदायत मिली है. 28 जून को यात्रा शुरू होने से एक दिन पहले राज्य सरकार ने भी हमले की आशंका जताई थी.

इसे देखते हुए सुरक्षा अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा काफी कड़ी रखी गई थी.. 

*अमरनाथ यात्रा के लिए सरकार ने पुलिस, सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के 35 से 40 हजार जवानों को तैनात किया गया है.

*राज्य में सीआरपीएफ की 250 कंपनियां मुहैया करवाई गईं हैं जिनमें 25,000 जवान हैं. *बीएसएफ ने यात्रा के मार्ग में करीब 2,000 जवानों को तैनात किया है.

*सेना ने पांच बटालियन मुहैया करवाई हैं.  

*इनके अलावा पुलिस की अतिरिक्त 54 कंपनियों को भी यहां लाया गया है.

*यात्रियों और यात्रा रूट पर संदिग्धों पर ड्रोन से नज़र रखी जा रही है.

*जगहजगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.

*यात्रा रूट और आधार शिविरों के आसपास जैमर भी लगाए गए हैं.

इतना ही नहीं लगातार आतंकी हमलों का अलर्ट मिलने पर कई तरह के एहतियात भी बरते जा रहे थे. जम्मूश्रीनगर हाईवे पर अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही थी. दक्षिणी कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. संदिग्ध तत्वों की धरपकड़ के लिए कई इलाकों में अभियान चलाया गया था.

कश्मीर में आतंकियों का निशाना बने अमरनाथ यात्री अपने रिस्क पर बाबा बर्फानी के दर्शन को जा रहे थे. जानकारी के मुताबिक इस रास्ते पर 50 मिनट पहले ही सुरक्षा हटाई गई थी और 8.20 बजे आतंकियों ने श्रद्धालुओं की बस को निशाना बनाया डाला. इससे पहले श्रद्धालुओं का आधिकारिक काफिला शाम 4 बजे अमरनाथ गुफा के लिए निकला था. इसके बाद 7.30 बजे पेट्रोल पार्टी ने गश्त हटा ली. ऐसे में इन यात्रियों को सुरक्षा नहीं मिल पाई.

सूत्रों के मुताबिक गुजरात की ये बस शाम 5 बजे श्रीनगर से बिना पुलिस सुरक्षा के आगे बढ़ी थी. इसके बाद बस में सवार यात्री शायद श्रीनगर में घूमने लगे और काफिले से अलग हो गए. बताया जा रहा है बस श्राइन बोर्ड में रजिस्टर भी नहीं थी. हमले में अब तक 7 लोगों की मौत हो गई है.

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का कहना है कि ये बस आधिकारिक काफिले का हिस्सा नहीं थी और बस ने सभी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया है. सुरक्षा एजेंसियों से मिली जानकारी के मुताबिक ये यात्री दो दिन पहले ही अमरनाथ यात्रा पूरी कर चुके थे. ये लोग पिछले 24 घंटे से से श्रीनगर और आसपास के इलाकों में घूम रहे थे. पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में और जानकारी जुटा रही हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में श्रद्धालुओं पर हुए हमले को लेकर दुख जताया है. प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा कि भारत ऐसे कायराना हमलों के आगे नहीं झुकेगा. प्रधानमंत्री ने मारे गए लोगों के साथ संवेदना जताई है. साथ ही उन्होंने राज्यपाल और जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री के साथ बात की है और सभी तरह के सहयोग और सहायता का वादा किया है.

हमले के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती अनंतनाग के अस्पताल पहुंचीं. घायलों से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इस घटना से कश्मीर का सिर झुक गया है. दोषियों को छोड़ेंगे नहीं.

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