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राष्ट्रपति चुनाव : मतदान संपन्न, रिकार्ड 99 फीसदी हुआ मतदान, पढ़ें चुनाव की पूरी प्रक्रिया, साथ ही किसका पलड़ा है भारी

तर्कसंगत

July 18, 2017

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देश के 14वें राष्ट्रपति चुनाव के लिए सोमवार को वोटिंग खत्म हो गई है.  इस बार रिकॉर्ड 99 फीसदी मतदान हुआ है वहीं मतगणना 20 जुलाई को होगी. हालांकि, राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का जीतना तय माना जा रहा है. हालंकी दोनों धड़े अपनेअपने उम्मीदवार की जीत का दावा कर रहे हैं. लेकिन आइए जानते हैदोनों उम्मीदवारों के बारे मेंराष्ट्रपति चुनाव की पूरी प्रक्रिया और साथ ही इस चुनाव में किसका पलड़ा भारी है.

कौन हैं रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार ?

 रामनाथ कोविंद

रामनाथ कोविंद का घर कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौख में हैं. अमित शाह से उनकी नजदीकियां तब बढ़ीं जब वो यूपी के प्रभारी बने. उन दिनों रामनाथ कोविंद भाजपा के यूपी अध्यक्ष डा. लक्ष्मीकांत बाजपेयी की टीम में महामंत्री थे. उनको बिहार का राज्यपाल चुनना इसका सुबूत था. दरअसल रामनाथ को काफी मेधावी माना जाता है

पढ़ाई के दौरान वो आईएएस की तैयारी कर रहे थेतीसरी बार में आईएएस अलाइड सर्विसेज के लिए उनका सलेक्शन हुआ भीलेकिन उन्होंने ज्वॉइन नहीं किया. पढ़ाई के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से वकालत शुरू कर दीयहीं से उनकी मुलाकात मोरारजी देसाई से हुईउनके सचिवों की टीम में भी काम किया

जनता पार्टी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जूनियर काउंसलर के बतौर काम किया. फिर बीजेपी से उनकी नजदीकियां बढ़ने लगीं. 1993 और 1999 में बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा में एमपी बनाकर भी भेजा. बीजेपी ने उन्हें अनुसूचित जाति का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया.

मीरा कुमार 

पूर्व उप प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार 1973 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुईं. करीब 80 के दशक में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और1985 में पहली बार बिजनौर से सांसद चुनी गईं.  मीरा कुमार 1990 में कांग्रेस कार्यकारिणी की सदस्य और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की महासचिव चुनी गईं.1996 में वो दूसरी बार सांसद बनीं और फिर साल 1998 में भी उन्होंने चुनाव जीता. साल 2004 में उन्होंने बिहार के सासाराम से लोकसभा सीट जीती

साल 2004 में उन्हें यूपीए सरकार में सामाजिक न्याय मंत्रालय दिया गया. साल 2009 में वो पांचवी बार लोकसभा चुनाव जीतीं और उन्हें लोकसभा स्पीकर बनाया गया.

राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया

राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल यानी इलेक्टोरल कॉलेज करता है. संविधान के आर्टिकल 54 के अनुसार जनता अपने प्रेजिडेंट का चुनाव सीधे नहीं करती,बल्कि उसके वोट से चुने गए लोग करते हैं. इस चुनाव में सभी प्रदेशों की विधानसभाओं के विधायकों और लोकसभा तथा राज्यसभा के सांसदों को वोट डालने का अधिकार होता है.

वहीं संसद के नॉमिनेटेड मेंबर वोट नहीं डाल सकते. साथ ही राज्यों की विधान परिषदों के सदस्यों को भी वोटिंग का अधिकार नहीं हैक्योंकि वे जनता द्वारा चुने गए सदस्य नहीं होते

जनप्रतिनिधियों के वोट की कीमत

लोकसभा और राज्यसभा के कुल सदस्यों की संख्या को मिला दिया जाए तो इसका आंकड़ा 776 पहुंच जाता है. यानि 776 सांसद इसमें वोट दे सकते हैं. इन सांसदों के पास कुल 5,49,408 वोट हैंजबकि पूरे देश में 4120 विधायक हैंजिनके पास 5,49, 474 वोट हैं. इस तरह कुल वोट 10,98,882 हैं और जीत के लिए आधे से एक ज्यादा यानी 5,49,442 चाहिए होते हैं.

MLA की वोट की कीमत

विधायकों के मामले में वो जिस राज्य का विधायक होउसकी आबादी देखी जाती है. इसके अलावा प्रदेश के एमएलए सदस्यों की संख्या भी मायने रखती है. वोट की कीमत निकालने के लिए राज्य की जनसंख्या को विधायकों की कुल संख्या सेभाग किया जाता है. उसके बाद निकले परिणाम को 1000 से फिर भाग किया जाता है. अंत में जो टोटल निकलता हैवो विधायक के वोट की कीमत होती है.   

MP के वोट की कीमत

सांसदों के वोट की कीमत अलग ढंग से तय की जाती है. पहले सभी राज्यों की विधानसभाओं के इलेक्टेड मेंबर्स के वोटों की कीमत को जोड़ा जाता है. परिणाम को राज्यसभा और लोकसभा के इलेक्टेड मेंबर्स की कुल संख्या से भाग किया जाता है. अंत में आया नंबर मिलता हैवह एक सांसद के वोट की कीमत होता है.

कोविंद और मीरा में किसका पलड़ा भारी

अगर आंकड़ों की बात करें तो फिलहाल राष्ट्रपति चुनाव के निर्वाचक मंडल में वोटों के मामले में एनडीए को बढ़त हासिल है. एनडीए के 5.27 लाख वोट हैं वहीं और यूपीए के 3.53 लाख वोट है. यानि आंकड़ों के आधार पर यूपीए एनडीए से 1.74 लाख वोट पीछे है. अगर बीजेपी विरोधी पार्टियों और यूपीए के वोट एक साथ जोड़ दें तो भी एनडीए 93 हजार वोटों से आगे दिखता है.  

कोविंद की जीत पक्की !

आंकड़ों की बात की जाए तो बिहार के पूर्व राज्यपाल कोविंद की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है, क्योंकि उन्हें एनडीए के अलावा जेडीयू और बीजू जनता दल (बीजेडी) जैसे विपक्षी दलों का भी समर्थन हासिल है. यहां जेडीयू के पास निर्वाचक मंडल का कुल 1.91 फीसदी वोट है, जबकि बीजेडी के पास 2.99 फीसदी वोट है. इसके अलावा तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के पास 2%, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) का एक गुट (5.39 %) और वाईएसआर कांग्रेस (1.53%) ने भी कोविंद के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की है. वहीं तृणमूल कांग्रेस और सपा के सदस्यों ने राष्ट्रपति चुनाव में क्रॉस वोटिंग भी की. अगरतला में तृणमूल के छह बर्खास्त विधायक और कांग्रेस के एक बागी विधायक ने पार्टी लाइन से हटकर रामनाथ कोविंद को वोट दिए.

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