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गरीब पिता की मेहनत को साकार करती एक बेटी

तर्कसंगत

July 20, 2017

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कामयाबी किसी की मोहताज नहीं होती है बस लगन और मेहनत की आवश्यकता होती है. इसकी मिसाल है छत्तीसगढ़ के सनावल गांव की एक गरीब परिवार की बेटी जिसने ये साबित कर दिया की कामयाबी के आगे गरीबी आड़े नहीं आती. गरीब ऑटो रिक्शा चालक भगवान पटवन्धी की बेटी किरण ने IIT की एंट्रेंस परीक्षा में 169वां रैंक हासिल किया है.

ना खेती की जमीन, ना सिर छिपाने को छत. जब गांव में गुजारा मुश्किल हो गया तो कोई दस साल पहले किरण के पिता ने गांव छोड़ शहर जाने का फैसला किया. जिला मुख्यालय अंबिकापुर में भगवान पटवन्धी ने पहले रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पाला फिर किसी तरह एक ऑटोरिक्शा खरीदा. लेकिन इस दौरान ये गरीब पिता अपनी इकलौती बेटी को पढ़ने के लिए स्कूल जरुर भेजता रहा. भगवान पटवन्धी ने गरीबी झेलते हुए बेटी को इस मुकाम पर ला खड़ा कर दिखाया और बेटी के आगे की पढ़ाई के लिए जद्दोजहद कर यह पिता अपनी बेटी को आत्मनिर्भर बनाना चाहता है.

किरण की प्रारंभिक शिक्षा अम्बिकापुर के एक निजी शैक्षणिक संस्थान से शुरू हुई बाद में उसने शासकीय कन्या परिसर में रहकर पढ़ाई की. अपने माता पिता से प्रेरणा लेकर किरण पटवन्धी राज्य सरकार द्वारा चलाये जा रहे प्रयास आवासीय विद्यालय के लिए चयनित हुई और दो साल तक अपने लगन और मेहनत के साथ पढ़ाई कर उसने आज यह मुकाम हासिल किया. उसके मन मे ईच्छा है कि वह यूपीएससी एग्जाम में क्वालीफाई करे जिसके लिए वह अभी से प्रयासरत है.

जिले के कलेक्टर अवनीश शरण का कहना है कि आईआईटी में एसटी कैटेगरी से राज्य में टॉप करने वाली आदिवासी छात्रा किरण ने जिले का नाम रौशन किया है. शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश सरकार द्वारा संचालित योजना का लाभ किरण को मिल रहा है. इसके अलावा उन्होंने किरण को भविष्य हर संभव मदद दिलाने का आस्वासन भी दिया है.

आईआईटी के लिए चयनित होकर किरण ने जिले को गौरान्वित तो किया ही है,इसके साथ ही उसने गाँव के गरीब उन हजारो छात्रछात्राओं के लिए एक मिसाल पेश की है. जाहिर है पूरे जिले को अपनी इस बेटी पर फक्र है. आखिरकार किरन ने एक बार फिर ये साबित कर दिखाया है कि कामयाबी की उड़ान पंख से नहीं मेहनत, लगन और हौसले से होती है

Courtesy- ANI

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