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रेप पीड़ित 10 साल की बच्ची के गर्भपात के मामला :सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की गर्भपात याचिका

तर्कसंगत

July 28, 2017

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10 साल की बलात्कार पीड़ित गर्भवती बच्ची की गर्भपात की जनहित याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

पीजीआई चंडीगढ़ के मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गर्भपात से लड़की की जान को खतरा हो सकता है.

इससे पहले चंडीगढ़ की जिला अदालत ने 18 जुलाई, 2017 को अपने एक फैसले में पीड़िता को गर्भपात की इजाजत देने से इंकार कर दिया था. इसके बाद वकील अलख आलोक श्रीवास्तव ने यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की थी.

न्यायलय ने कहा, ‘गर्भ 32 हफ्ते का है, ऐसे में नाबालिग बच्ची के लिए गर्भपात से जोखिम बहुत ज्यादा है. यह कोई शुरुआती गर्भ का मामला नहीं है.’ हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित बच्ची को सभी तरह की चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने का निर्देश दिया.

बच्ची के साथ बलात्कार का यह मामला उस समय सामने आया था जब उसने पेट दर्द की शिकायत अपने परिजनों से की थी. इसके बाद परिजनों ने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया जहां डॉक्टरों ने उसे गर्भवती घोषित किया.

10 वर्षीय बच्चे के गर्भवती होने पर खुद डॉक्टर हैरान थे. उनका कहना था कि उन्होंने इससे पहले कभी ऐसा मामला नहीं देखा, जिसमें इतनी कम उम्र में कोई बच्ची गर्भवती हुई हो.

डॉक्टरों के अनुसार इस उम्र में गर्भवती होने से भ्रूण का ठीक से विकास भी नहीं हो पाता.

बाद में खुलासा हुआ कि बच्ची के साथ बलात्कार करने का आरोपी खुद उसका सगा मामा है.

आपको बता दें कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनैंसी ऐक्ट के तहत 20 सप्ताह तक के अविकसित और असामान्य भ्रूण के गर्भपात की अनुमति देता है. न्यायालय भ्रूण के अनुवांशिकी रूप से असमान्य होने की स्थिति में भी अपवाद स्वरूप गर्भपात का आदेश दे सकता है.

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