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सफ़ाई कर्मचारी दिवसः मध्य प्रदेश में दम घुटने से चार की मौत

Poonam

July 31, 2017

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आज सफ़ाई कर्मचारी दिवस है. भारत में 1964 के बाद से हर साल 31 जुलाई को सफ़ाई कर्मचारी दिवस के रूप में मनाया जाता है.

लेकिन मध्य प्रदेश में बीती रात सफ़ाई कर्मचारियों के लिए मौत बनकर आई.

राज्य के देवास ज़िले में एक सैप्टिक टैंक साफ़ कर रहे चार सफ़ाई कर्मचारियों की दम घुटने से मौत हो गई है.

स्थानीय पुलिस ने स्थानीय मीडिया से इन मौतों की पु्ष्टि की है.

अंग्रेज़ी अख़बार द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक देवास ज़िले के बारडू गांव में टॉयलेट का टैंक साफ़ करते हुए ज़हीरीली गैस से विजय (21), रिंकू (18), इश्वर ठाकुर (38) और दिनेश (40) की मौत हो गई.

ये सभी लोग देवास के ही रहने वाले थे. कमल सांधव नाम के व्यक्ति ने अपने घर के बाहर बने आठ फुट गहरे सैप्टिक टैंक को साफ़ करने के लिए पांच लोगों को मज़दूरी पर बुलाया था.

देवास के पुलिस अधीक्षक अनुशमन सिंह ने मीडिया को बताया कि बीती रात नौ बजे के करीब इन पांचों में से एक व्यक्ति टैंक से निकाले गए मल को टैंकर में भरकर लेकर गया था.

लेकिन टैंक में और मल होने के कारण चार लोग सीढ़ी की सहायता से टैंक में नीचे उतरे थे. लेकिन टैंक में किसी ज़हरीली गैस के रिसाव के कारण चारों की दम घुटने से मौत हो गई. दस बजे के क़रीब जब पांचवा सफ़ाईकर्मी जब खाली टैंकर लेकर लौटा तब चारों की मौत के बारे में लोगों को पता चला.

पुलिस ने इन मौतों के सिलसिले में सीआरपीसी की धारा 174 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

सफाई कर्मचारी दिवस

सीवर या गटर का नाम आते ही आप नाक सिकोड़ लेते होंगे लेकिन हर साल हज़ारों लोग जाम सीवर की मरम्मत करने के दौरान दम घुटने से मारे जाते हैं. हर मौत का कारण ये वही गटर है जिसके आस पास से आप गुज़रना भी पसंद नहीं करते.

नियमों के बावजूद भारत में सफाई कर्मचारियों की स्थिति में ज़्यादा परिवर्तन नहीं आया है. यहां बिना किसी सुरक्षा के ही उन्हें सीवर में उतरना पड़ता है.

हर साल हज़ारों सफाई कर्मचारियों की गंदे नालों से निकलने वाली ज़हरीली गैसों की वजह से मौत हो जाती है.

नियम तो यह है कि सीवेज की सफाई करते समय कर्मचारी के पास सूट, मास्क और गैस सिलेंडर होना चाहिए. इनका सूट स्पेसिफिक होता है जो गंदे पानी से कर्मचारियों की सुरक्षा करता है लेकिन उन्हें ये चीज़ें मुहैया नहीं कराई जातीं.

एक गैर लाभकारी संगठन प्रैक्सिस इंडिया की 2014 में ज़ारी रिपोर्ट ‘डाउन द ड्रेन’ के मुताबिक, सिर्फ दिल्ली में ही एक साल में 100 से ज़्यादा सफाई कर्मचारियों की नालों और सीवर टैंकों की सफाई करने के दौरान मौत हो जाती है.

तहलका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल सीवर में काम करते समय 22,327 लोगों की मौत हो जाती है. सिर्फ मुंबई में हर महीने 20 से ज्यादा सीवर साफ करने वालों की मौत होती है.

तस्वीर साभारः सुधारक ओल्वे

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