मेरी कहानी

#मेरीकहानी :एक ही दिन में मैं एक बच्चे से भिखारी बन गया

तर्कसंगत

July 31, 2017

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आज पूरे दिन भीख मांगने के बाद मुझे एक व्यक्ति ने कुछ रुपये दिये. वो मेरी जिंदगी का पहला दिन था जब पेट भरने के लिए मैने भीख मांगी. जब मैं दो दिनों से भूखा था और मेरे जेब भी खाली थे. पैसे मिलने के बाद मैं गली के एक कोने में जाकर फूटफूट कर रोया. तब मेरी उम्र महज 11 साल थी. एक ही दिन में मैं एक बच्चे से भिखारी बन गया. मैं वहां से कहीं भाग जाना चाहता था और भूल जाना चाहता था की मैने भीख मांगी है. लेकिन मैने फिर अगले ही दिन भीख मांगी और ये सिलसिला कई महिनों तक चलता रहा. मैं अब एक बच्चा नहीं रहा और मैं खुद में भी अच्छा महसूस नहीं करता था. लोग मुझे भिखारी कहने लगे और कोई मुझसे पुछता भी की तुम कौन हो तो मैं भी कह देता भिखारी हुं साब. अब मैं किसी के लिए भी बच्चा नहीं था. अब मैं सिर्फ और सिर्फ एक भिखारी था. मैने हंसना छोड़ दिया था क्योंकि हंसते हुये चेहरे को कोई भीख नहीं देता. मैने भीख मांगने के लिए उदास चेहरा बनाना सीख लिया था. मैने उपर देखना छोड़ दिया, मैं सिर्फ अपने पैर में नजरें गड़ाये रखता था. मुझे बहुत ही बुरा लग रहा था, हर गुजरते दिन के साथ मैं खुद की नजरों में गिरता जा रहा था. लेकिन मुझे कुछ आता नहीं था और मैं कहीं जा भी नहीं सकता था.

मैं जिस जगह भीख मांगता था वहीं एक बिना दांत वाले बेहद ही वृद्ध व्यक्ति थे जिनका नाम था काशिम मियां. उनकी उम्र 90 वर्ष थी. मैं उन्हें जूता साफ करते और हमेशा मुस्कुराते देखता था. एक दिन सुबह मैं उनके पास गया और मैने देखा की किस तरह वो काम शुरु करने से पहले सामानों को तैयार कर रहे थे. मुझसे रहा नहीं गया तो मैने उनसे पूछ ही लिया कि इस उम्र में दूसरों के जूते साफ करना आपको बुरा नहीं लगता ? काशिम मियां मेरी बात सुनकर जोर से हंस पड़े परंतु उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. उन्होंने बस ये कहा की तुम मुझसे काम सिख लो. मैं हैरान था और मैने मोची बनने से इंकार कर दिया. मैं गुस्से से वहां से चला गया. लेकिन उसी दिन मैं फिर उनके पास गया औऱ घर तक उनके पीछे गया. मैने  उनसे सारा काम सिख लिया. उन्होंने मुझे काम करने के सारे औजार दिये लेकिन जब मैं पहले दिन काम पर गया तो वो बहुत बीमार हो गये. मैं इस काम के लिये नया था इसलिये मन में बहुत घबराहट थी. काशिम मियां ने मुझे अपनी बाहों में पकड़कर कहा कीबिजॉय अगर तुम ईमानदारी से काम करोगे, अच्छा काम करोगे तो तुम्हे कभी बुरा नहीं लगेगा, हमेशा तुम्हे अच्छा महसूस होगा. अगर तुम्हे बुरा लग रहा है तो तुम जरुर कुछ बुरा कर रहै हो.’ पिछले 44 सालों से मैं गरीबी और मुफलसी में जी रहा हूं लेकिन मुझे कभी बुरा नहीं लगा और कभी खुद को गलत महसूस नहीं किया.

– Bijoy Das (55)

I received money from one person after whole day of begging. That was the first day of my life, I begged to feed myself….

Posted by GMB Akash on Thursday, 27 July 2017

कहानी और चित्र का स्रोत-GMB Akash

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