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दिल्ली में तमिलनाडु से आये किसानों को गुरुद्वारे का सहारा

तर्कसंगत

August 2, 2017

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सिख समुदाय हमेशा से ही अपने सेवा भाव के लिए जाना जाता है. इतिहास गवाह है कि बिना किसी भेदभाव, ऊंचनीच के ये समुदाय हमेशा जरुरतमंदों के लिए खड़ा रहा. ताजा मामला देखने को मिला दिल्ली में जहां तमिलनाडु के किसानों के लिए लंगर का इंतजाम किया जाता है, जो यहां कर्ज माफी और सूखा राहत राशि के लिए आंदोलनरत हैं.

दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष मंजीत सिंह ने मीडिया से बताया की ये आंदोलनकारी जंतरमंतर तक दूर स्थानों से आए हैं. न तो ये यहां की भाषा जानते हैं और न हीं उन्हें खानेपीने की जगह का आइडिया है इसलिए हम उन्हें दिन में दो बार लंगर परोस रहे हैं.

हम उन्हें आवास प्रदान करने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं हालांकि किसानों ने अभी तक स्वयं उस सेवा के लिए नहीं कहा है. बंगला साहिब गुरुद्वारा रोज करीब 10,000 आगंतुकों को लंगर में तीन रोटी, दाल, सब्जी और खीर परोसते हैं.

मीडिया से बात करते हुए किसान ने बताया कि रोजाना गुरुद्वारे से लंगर खाकर गुजारा कर रहे हैं. दोपहर में एक-दो लोग कभी ऑटो से कभी पैदल जाकर लंगर ले आते हैं और यहां आकर बाकी के साथियों को खिलाते हैं. किसान रामालिंगम ने बताया कि हम लोग लंगर सिर्फ अपने लोगों के लिए ही नहीं लाते बल्कि जंतर-मंतर पर दूसरे प्रदर्शनकारी जिन्हें भूख होती है उन्हें भी दे देते हैं.

किसान बताते है कि यह गुरु का प्रसाद है. इससे हिम्मत भी मिलती है आगे की लड़ाई लड़ने का हौसला भी. किसान लाइन में बैठकर ही लंगर खाते हैं क्योंकि गुरुद्वारे में लोग ऐसे ही खाते हैं.

मनजीत सिंह ने ये भी बतया की किसी की सेवा जात या रंग देखकर नहीं होती. कोई भी जरूरतमंद आ सकता है और गुरु का लंगर छक सकता है. उन्होंने बताया कि नोटबंदी के दौरान कर्नाटक से कुछ महिलाएं प्रदर्शन के दौरान आईं थीं. उनके पास पैसे नहीं थे. उनकी मदद भी गुरुद्वारा बंगला साहिब ने की.

तमिलनाडु किसानों के आंदोलन को अब तक 100 से ज्यादा दिन हो चुके हैं. वे यहां पर 40,000 रुपए सूखा राहत राशि, फसल कर्ज माफी के साथ कावेरी मुद्दे को हल करने के लिए कमिटी की मांग करने आए हैं.  

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगी दी है जिसमें हाई कोर्ट ने तमिलनाडु में किसानों के कर्ज माफ करने का आदेश दिया था लेकिन किसानों का आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है.

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