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जन्मदिन मुबारक शकील बदांयूनी

तर्कसंगत

August 3, 2017

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“मैं शकील दिल का हूँ तर्जुमा कि मोहब्बतों का हूँ राज़दान

मुझे फ्रख है मेरी शायरी मेरी जिन्दगी से जुदा नहीं”

मशहूर शायर और गीतकार शकील बदायुनी का 101वां जन्मदिन है उन्होंने बॉलीवुड के लिए कई सदाबहार नगमे लिखे जिन्हें आज भी खूब पसंद किया जाता है. शकील बहुत बड़े शायर थे. शकील की शायरियों में उनकी जिंदगी का दर्शन होता है.

शकील बदायुनी का नाम शकील अहमद था. उनका जन्म 3 अगस्त 1916 को उत्तर प्रदेश के बदायुं जिले में हुआ था। शकील साहब के पिता मोहम्मद जमाल अहमद कादरी चाहते थे कि शकील अच्छी तालीम हासिल करें. इसलिए उन्होंने शकील को अरबी, उर्दू, फारसी और हिंदी की तालीम दी. शकील ने बदायुं में रहकर ही बीए तक की शिक्षा हासिल की और इसके बाद वो 1942 में दिल्ली आ गए.

दिल्ली में उन्होंने आपूर्ति विभाग में आपूर्ति अधिकारी के रूप में अपनी पहली नौकरी की. इस बीच वह मुशायरों में भी हिस्सा लेते रहे, जिससे उन्हें पूरे देश भर में शोहरत हासिल हुई. अपनी शायरी की कामयाबी से उत्साहित शकील बदायूंनी ने आपूर्ति विभाग की नौकरी छोड़ दी और वर्ष 1946 में दिल्ली से मुंबई आ गए.

मुंबई में उनकी मुलाकात उस समय के मशहूर निर्माता एआर कारदार उर्फ कारदार साहब और महान संगीतकार नौशाद से हुई. यहां उनके कहने पर उन्होंने ‘हम दिल का अफ़साना दुनिया को सुना देंगे, हर दिल में मोहब्बत की आग लगा देंगे…’ गीत लिखा. यह गीत नौशाद साहब को काफ़ी पसंद आया जिसके बाद उन्हें तुरंत ही कारदार साहब की दर्द के लिए साइन कर लिया गया.

शकील बदायूंनी ने क़रीब तीन दशक के फ़िल्मी जीवन में लगभग 90 फ़िल्मों के लिये गीत लिखे. उनके फ़िल्मी सफर पर एक नजर डालने से पता चलता है कि उन्होंने सबसे ज्यादा फ़िल्में संगीतकार नौशाद के साथ ही की. वर्ष 1947 में अपनी पहली ही फ़िल्म दर्द के गीत ‘अफ़साना लिख रही हूं…’ की अपार सफलता से शकील बदायूंनी कामयाबी के शिखर पर जा बैठे. उन्होंने सबसे ज्यादा फिल्मे संगीतकार नौशाद के साथ की. उनकी जोड़ी प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद के साथ खूब जमी और उनके लिखे गाने जबर्दस्त हिट हुए.

शकील बदायूँनी के रचित प्रमुख गीत हैं-

अफ़साना लिख रही हूं… (दर्द)
चौदहवीं का चांद हो या आफ़ताब हो… (चौदहवीं का चांद)
जरा नज़रों से कह दो जी निशाना चूक न जाये.. (बीस साल बाद, 1962)
नन्हा मुन्ना राही हूं देश का सिपाही हूं… (सन ऑफ़ इंडिया)
गाये जा गीत मिलन के.. (मेला)
सुहानी रात ढल चुकी.. (दुलारी)
ओ दुनिया के रखवाले.. (बैजू बावरा)
दुनिया में हम आए हैं तो जीना ही पड़ेगा (मदर इंडिया)
दो सितारों का जमीं पर है मिलन आज की रात.. (कोहिनूर)
प्यार किया तो डरना क्या…(मुग़ले आज़म)
ना जाओ सइयां छुड़ा के बहियां.. (साहब बीबी और ग़ुलाम, 1962)
नैन लड़ जइहें तो मन वा मा कसक होइबे करी.. (गंगा जमुना)
दिल लगाकर हम ये समझे ज़िंदगी क्या चीज़ है.. (ज़िंदगी और मौत, 1965)

शकील बदायूंनी को अपने गीतों के लिए तीन बार फिल्म फेयरअवार्ड से नवाजा गयाए. इनमें वर्ष 1960 मे प्रदर्शित चौदहवी का चांद के चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो, वर्ष 1961 मे घराना के गीत हुस्न वाले तेरा जवाब नही और 1962 मे बीस साल बाद में कहीं दीप जले कहीं दिल गाने के लिये फिल्मफेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया.

शकील बदायुनीं का मुकाम शायरी और फिल्मी दुनिया में आज भी बहुत बड़ा है. इस महान शायर ने 20 अप्रैल 1970 को 54 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। शकील बदायुंनी अपनी शायरी और गीतों से लोगों के दिलों में अमर हो गए. उन्हें उनके गीतों के साथ हमेशा याद किया जाता रहेगा।

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