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झुंझुनू की ये महिलाएं मिसाल है समाज के लिए

तर्कसंगत

August 4, 2017

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महिलाओं से, महिलाओं द्वारा और सिर्फ महिलाओं के लिए राजस्थान के झुंझुनू में महिलाओं ने सेनेटरी नैपकिन बनाने की यूनिट शुरूआत की है. इसमें सिर्फ महिलाएं ही काम करती हैं. ये महिलाएं सेनैटरी नैपकीन बनाकर ना जाने कितनी ही महिलाओं और बच्चियों की मदद कर रही है.

आनंदी सेनेटरी नैपकीन बाजार में मिलने वाले नैपकीन से 6 रुपए सस्ती है. जिसकी मार्केटिंग खुद महिलाएं करती है. इस पर जीएसटी भी नहीं लगता है, क्योंकि इसे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बनाती हैं. खास बात यह है कि नैपकिन की जिले में डिमांड इतनी ज्यादा है कि वे इसे पूरी नहीं कर पा रही हैं.

इस यूनिट को आठ महिलाओं ने इस साल फरवरी में शुरू किया था. अमृता फेडरेशन सोसाइटी नाम के इस समूह का संचालन महिला अधिकारिता विभाग करवा रहा है. इस यूनिट पर अब हर महीने 15 से 20 हजार नैपकिन बन रहा है. जबकि जिले में हर महीने 30 हजार नैपकिन की डिमांड है. सोसाइटी के बैंक खाते में बचत के चार करोड़ रुपए जमा हैं. इसमें से ढाई करोड़ रुपए समूह से जुड़ी सदस्यों को सिलाई, डेयरी आदि कामों के लिए लोन के रूप में दे रखा है.

इस केन्द्र से झुंझुनू की करीब 15 हजार महिलाएं जुड़ी हैं. वे अानंदी सेनेटरी नैपकिन की मार्केटिंग कर रहीं हैं. वे गांवों में जरूरतमंद महिलाओं तक इसे पहुंचा रही हैं. कीमत 28 रु. है. एक पैकेट में 8 पीस होते हैं. महिलाओं को हर पैकेट पर तीन रु. का कमीशन मिलता है. इसके लिए जिले में 1593 आंगनबाड़ी केंद्र पर अमृता कॉर्नर खोले जा रहे हैं. स्कूलकॉलेजों में भी ऐसे कॉर्नर खोले जा रहे हैं. छह स्कूलकॉलेजों में ऐसे कार्नर खोले भी जा चुके हैं.

आपको बतादें कि सेनेटरी नैपकिन बनाने के लिए महिलाओं को ट्रेनिंग भी दी गई है. वहीं स्कूल कॉलेज में ऐसे कॉर्नर खोले जा रहै है. मार्केट में सेनेटरी नैपकीन महंगे मिलने के कारण गरीब महिलाएं इनका इस्तेमाल नहीं कर पाती जिस वजह से खतरनाक बीमारी होने के खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में ये सस्ते नैपकीन महिलाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं. लगातार मेहनत कर ये महिलाएं डिमांड पूरी करने की कोशिश में कार्यरत हैं.

PIC. Dainik Bhaskar

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