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सेल्फी से होने वाली मौतों में सबसे आगे है भारत

तर्कसंगत

August 8, 2017

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आज की युवा पीढ़ी में लगातार सेल्फी का क्रेज बढ़ता जा रहा है. सेल्फी के लिए नौजवान किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं..एक अदद अच्छी सेल्फी के लिए कई बार युवा अपनी जान भी जोखिम में डाल देते हैं.

सड़क हो, बाज़ार हो, रेलवे स्टेशन हो या फिर कोई ऊंची इमारत कोई ना कोई आपको खतरनाक सेल्फी लेता दिख ही जाएगा.

भारत में भी सेल्फी का क्रेज लगातार बढ़ रहा है और यही सेल्फी लोगों की मौत की वजह बन रही है. आंकड़ों के मुताबिक भारत सेल्फी लेने के दौरान होने वाली मौतों के मामले में दुनिया में सबसे ऊपर है.. 

दुनियाभर में मार्च 2014 से सितंबर 2016 के बीच 127 मौतें सेल्फी लेने के दौरान हुई है. जबकि अकेले भारत में ये आकंड़ा 76 है. जो कुल मौतों का 60 फीसदी है. आकंड़े बताते हैं कि सबसे ज्यादा मौते ट्रेन, नदी, समुद्र किनारे सेल्फी लेने के दौरान हुई है.

युवा ऐसी जगह सेल्फ़ी लेते हैं जो ख़तरनाक होती है. ये फिर कोई ऊंची इमारत, रेलवे ट्रेक या फिर बाढ़ वाला इलाका हो सकता है.

लेकिन सेल्फ़ी लेने के दौरान हुई एक चूक कई बार जान भी ले लेती है. जानकारों का ये भी मानना है कि युवाओं में अपने साथियों में धाक जमाने की होड़ होती है और इसी होड़ में वो ऐसी जगह सेल्फ़ी लेना चाहते हैं जहां पहले किसी ने न ली है.

सेल्फीटिस” आज का नया रोग

अमेरिकन साइकेट्रिक एसोसिएशन के मुताबिकअगर आप दिन में तीन से ज्यादा सेल्फी लेते हैंतो यकीनन आप मानसिक रूप से बीमार हैं और इस बीमारी को सेल्फीटिस का नाम दिया.

वास्तव में यह उस बीमारी का नाम हैजिसमें व्यक्ति पागलपन की हद तकअपनी फोटो लेने लगता है और 

उसे सोशल मीड़िया पर  पोस्ट करने लगता है.

इसके कई और नकारात्मक प्रभाव भी हैं.  ज़्यादा सेल्फ़ी लेने वाले लोगों में धीरे-धीरे आत्मविश्‍वास कम होने लगता हैनिजता पूरी तरह से भंग हो जाती है और  एंग्‍जाइटी का इस कदर बढ़ जाती है कि आत्महत्या तक के विचार मन में आने लगते हैं.

यकीं मानिए इसका इलाज भी मुश्‍किल है और हरकेस में डॉक्‍टर फौरी तौर पर दवाइयां तो लिख देता है,लेकिन इसे एक तरह से रोगी को अपने हाल और हालात पर छोड़ देने के जैसा है.

बॉडी ड़िस्मॉर्फिक ड़िसऑर्ड़र

शोधकर्ताओं की मानें तो जरूरत से ज्यादा सेल्फी लेने की चाहत “बॉडी ड़िस्मॉर्फिक ड़िसऑर्ड़र” नाम की बीमारी को भी जन्म दे सकती है.

इस बीमारी से लोगों को एहसास होने लगता है कि वो अच्छे नहीं दिखते हैं. 

कॉस्मेटिक सर्जनों  का भी मानना है  कि सेल्फी के दौर ने कॉस्मेटिक सर्जरी कराने वालों की सँख्या में जोरदार इजाफ़ा किया हैजोबेहद चिन्तनीय है.

दिल्ली के अस्पतालों में रहे हैं सेल्फी के मरीज़

 मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक सेल्फी की वजह से होने वाली एक बीमारी के पेशंट दिल्ली के अस्पतालों में पहुंच रहे हैं.

ऑब्सेसिव कंप्लसिव डिसऑर्डर नाम की  बीमारी से पीड़ित तीन ऐसे मरीजों की पहचान एम्स में हुई है. 

सर गंगाराम अस्पताल में तो हर महीने चारपांच ऐसे टीनेजर्स इलाज के लिए पहुंच रहे हैंजिनमें सेल्फी से जुड़ी बीमारी देखी जा रही है. 

शहरों में यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है. बॉडी इमेज को बेहतर दिखाने की यह लत ज्यादातर लड़कियों में देखी जा रही है.

एक अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक ६० प्रतिशत महिलाएं सेल्फ़ी से जुडे़ रोगों से अनजान हैं.

दुनिया हाईटेक होती जा रही है और सेल्फी के क्रेज को देखते हुए मोबाइल कंपनियां भी कैमरे में लगातार नएनए फीचर ला रही हैं और युवा इसके गुलाम होते जा रहे हैं. इस बात से बेखबर कि एक खतरनाक सेल्फी उनकी आखिरी तस्वीर साबित हो सकती है.

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