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अदालत में मां ने बेटे के ख़िलाफ़ गवाही देकर बहू को दिलवाया हक़

तर्कसंगत

August 9, 2017

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हाल ही में बैंगलुरू की एक अदालत ने कर्नाटक के दिवंगत पूर्व मंत्री एसआर कशापनावार के बेटे देवानंद शिवाशंकरप्पा कशापनावार को अपनी पत्नी को साठ दिनों के भीतर 4.84 करोड़ रुपए का हर्जाना चुकाने का आदेश दिया.

अदालत ने पत्नीपत्नी के तलाक को भी मंजूरी दे दी. देवानंद ने क़ानूनों का उल्लंघन कर विवाहेत्तर संबंध बनाए थे और दूसरी शादी कर ली थी.

देवानंद की पत्नी रिश्ते में उसकी बहन की बेटी भी थी.

इस मामले का सबसे अनूठा पहली ये है कि एक मां ने अपने बेटे के ख़िलाफ़ गवाही दी और अपनी बहू को हर्जाना दिलवाया.

देवानंद की मां ने अदालत को बताया कि  उनके बेटे के पास काफ़ी पैसा है और वो अपनी पत्नी को हर्जाना देने की स्थिति में है,

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक जज के भाग्या ने याचिकाकर्ता को तलाक के पक्ष में फ़ैसले देने के बाद ये आदेश दिया है.

देवानंद की पत्नी ने अपनी शादी के चार साल बाद 2015 में तलाक की याचिका दायर की थी. पतिपत्नी फरवरी 2012 से ही अलगअलग रहे थे. दोनों ने मई 2011 में शादी की थी.

जज ने देवानंद को आदेश की तिथि चौबीस जुलाई से साठ दिनों के भीतर हर्जाने की रकम चुकाने का आदेश दिया है.

देवानंद की पत्नी ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(1) (ia)(ib) के तहत अपनी शादी को रद्द किए जाने की याचिका दायर की थी.

दूसरी शादी

जिस समय देवानंद ने शादी की थी तब याचिकाकर्ता पढ़ाई कर रहीं थी. जब शादी तय हुई थी तब देवानंद उसे बहुत पसंद करता था.

हालांकि शादी के बाद उसका व्यवहार पूरी तरह बदल गया और वो उसके साथ अजनबी की तरह पेश आने लगा. बाद में याचिकाकर्ता को पता चला कि देवानंद के एक महिला के साथ विवाहेत्तर संबंध हैं.

याचिकाकर्ता ने अपने पति के अफेयर और दूसरी शादी का मुद्दा उठाया. हिंदू मैरिज एक्ट के तहत पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी करना गैरकानूनी है.

जब याचिकाकर्ता ने अपने पति का विरोध किया तो उसे मारा पीटा गया और अभद्रता की गई. देवानंद ने याचिकाकर्ता से कहा कि उसने सिर्फ़ अपने पिता की अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए उससे शादी की है. पति के ये कहने के बाद याचिकाकर्ता ने अदालत जाने का फैसला लिया.

पति से अलग होने के बाद याचिकाकर्ता की सास ही उसका ध्यान रख रहीं थीं. याचिकाकर्ता ने अपने पति के साथ दोबारा संबंध मधुर करने की कोशिश भी की लेकिन वो नाकाम रही.

बेटे के ख़िलाफ़ मां की गवाही

देवानंद की मां ने अदालत में हलफ़नामा देकर कहा कि उसने परिवार की मर्ज़ी के खिलाफ जाकर दूसरी शादी की और उसे एक बेटा भी है.  उन्होंने अदालत को ये भी बताया कि ज़मीन का वारिस होने और काफ़ी पैसे होने के बावजूद उसने अपनी कानूनन पत्नी को अलग कर दिया और उसे प्रतिं अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा नहीं किया..

अदालत ने देवानंद को नोटिस भी जारी किए थे बावजूद इसके वो सुनवाइयों के दौरान हाज़िर नहीं हुए.  जज ने ये निर्णय दिया कि यदि याचिकाकर्ता को एकमुश्त 4.84 करोड़ रुपए का हर्जाना दिया जाता है तो उसके साथ न्याय होगा.

इस मामले में एक मां ने अपने बेटे के ख़िलाफ़ अदालत में गवाही देकर और अपनी बहू को उसका हक़ दिलवाकर एक अनूठी मिसाल पेश की है.

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