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एक किसान की बेटी की आत्महत्या…

तर्कसंगत

August 11, 2017

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“फसल जल गई है, अब आपको मेरी शादी की चिंता है. कहीं आप ख़ुदकुशी न कर लें इसलिए मैं अपनी ज़िंदगी ख़त्म कर रही हूं.”

ये शब्द एक किसान की बेटे की सुसाइड नोट से हैं.

भारत में किसानों का आत्महत्या करना कोई असामान्य बात नहीं हैं. हर दिन किसानों की आत्महत्या की ख़बर आती है और अब हालात ऐसे हो गए हैं कि अपनी सोशल मीडिया फीड में किसान की आत्महत्या की ख़बर को देखकर हम ठहरते नहीं बल्कि स्क्राल करके आगे बढ़ जाते हैं.

लेकिन महाराष्ट्र के पाथरी में किसान की बेटी की ख़ुदकुशी ने किसानों के बच्चों में पनप रही उदासी और घुटन को उजागर किया है.

18 वर्षीय सारिका सुरेश के पिता पर कर्ज़ था. इस साल उनकी फ़सल भी जल गई थी. ऐसे में जवान बेटी को लगा कि कहीं उसकी शादी की चिंता में पिचा ही जान न दे दे इसलिए उसने ही अपनी जान दे दी.

6 दिन पहले ही सारिका के चाचा देवीदास ने भी कर्ज़ के चलते ख़ुदकुशी की थी. सारिका ने अपने चाचा की आत्महत्या का ज़िक्र भी सुसाइड नोट में किया है.

सुसाइड नोट

नई दुनिया अख़बार के मुताबिक सारिका ने अपने सुसाइड नोट में लिखा, “प्यारे पापा, छह दिन पहले आपके भाई ने बारिश न होने की वजह से फसल बर्बाद होने पर ख़ुदकुशी कर ली. अपना परिवार भी कर्ज़ के बोझ से दबा है. बारिश नहीं हो रही है. आपने उधार लेकर फसल बोई, लेकिन फसल जल गई तो आपका हाल देख नहीं पा रही हूं. पिछले साल दीदी शारदा की शादी हुई, उसके लिए लिया गया कर्ज का बोझ अभी तक कम नहीं हुआ. अब आप पर मेरी शादी की भी ज़िम्मेदारी है. आप कहीं चाचा की तरह ख़ुदकुशी न कर लें इसलिए मैं अपनी जान दे रही हैं.”

भारत में इस समय किसानों को कई तरह दिक्कतों का सामना है. महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में छोटे किसानों का कर्ज़ माफ़ किया है लेकिन कई बार किसान साहूकारों से कर्ज लेते हैं और उसके बोझ में दबते चले जाते हैं.

सारिका ने मौत ने भारतीय किसानों की बदहाली को एक बार फिर से उजागर किया है. सवाल यही है कि क्या हमारी सरकारें किसानों को ग़रीबी के कुचक्र से बाहर निकाल पाएंगी?

Source: Nai Dunia

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