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लगातार हो रहीं सफाईकर्मियों की मौतों के लिए जिम्मेदार कौन ?

तर्कसंगत

August 13, 2017

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एक तरफ सरकार जहां स्वछता अभियान का मुद्दा जोर शोर से उठती है वहीँ सीवर और नाला सफाई के दौरान सफाईकर्मियों की मौतें परेशान करती हैं.

ताज़ा मामला दिल्ली के शहादरा जिले के आनंद विहार स्थित अग्रवाल फन सिटी मॉल में शनिवार दोपहर सेटलिंग टैंक की सफाई के लिए उतरे एक व्यक्ति और उसके दो पुत्र जहरीली गैस की चपेट में आ गए।

हादसे में दोनों पुत्रों की मौत हो गई, जबकि पिता बेहोश हो गया अब वह गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है.

इतना ही नहीं हादसे की खबर मिलने के बाद मौके पर पहुंचा दमकलकर्मी महिपाल सिंह भी सिर के बल टैंक में गिरने से जख्मी हो गया.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक मृतकों की शिनाख्त मो.जहांगीर (24) और मो.एजाज (22) पुत्र मो.यूसुफ के रूप में हुई है.

पुलिस उपायुक्त शाहदरा नूपुर प्रसाद ने बताया कि चारों को हेडगेवार अस्पताल ले जाया गया, जहां पहुंचते ही जहांगीर को मृत घोषित कर दिया गया.

कुछ ही देर बाद इजाज़ की भी मौत हो गई.

उन्होंने बताया कि यूसुफ और महिपाल का उस अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी हालत गंभीर है.

हालांकि इस तरह सेप्टिक टैंक और सीवर में होने वाली ये मौतें कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं.

बता दें कि राजधानी दिल्ली में एक महीने के अंदर सीवर और नाला सफाई के दौरान सफाईकर्मियों की मौत की यह तीसरी घटना है.

बीते 15 जुलाई को दक्षिण दिल्ली के घिटोरनी इलाके में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान दम घुटने से चार सफाई कर्मचारियों की मौत हो गई थी.

इसके बाद छह अगस्त को लाजपत नगर इलाके में स्थित कबीर राम मंदिर के नज़दीक एक सीवर लाइन की सफाई के दौरान तीन कर्मचारियों की मौत हो गई थी.

इन तीनों घटनाओं को मिलाकर देखा जाए तो राजधानी दिल्ली में सीवर सफाई के दौरान एक महीने के अंदर नौ लोगों की मौत हो चुकी है.

सफाईकर्मियों की मौत की एक और घटना मध्य प्रदेश के देवास ज़िले में 31 जुलाई को हुई थी. ज़िले से तकरीबन 60 किलोमीटर दूर पिपलरावा थाना इलाके के गांव बरदु में सेप्टिक टैंक की सफाई करने के लिए घुसे चार सफाईकर्मियों में से तीन की मौत हो गई थी.

सफाई कर्मचारियों की स्थिति में ज़्यादा परिवर्तन नहीं 

आपको बता दे नियमों के बावजूद भारत में सफाई कर्मचारियों की स्थिति में ज़्यादा परिवर्तन नहीं आया है. यहां बिना किसी सुरक्षा के ही उन्हें सीवर में उतरना पड़ता है.

हर साल हज़ारों सफाई कर्मचारियों की गंदे नालों से निकलने वाली ज़हरीली गैसों की वजह से मौत हो जाती है.

नियम तो यह है कि सीवेज की सफाई करते समय कर्मचारी के पास सूट, मास्क और गैस सिलेंडर होना चाहिए. इनका सूट स्पेसिफिक होता है जो गंदे पानी से कर्मचारियों की सुरक्षा करता है लेकिन उन्हें ये चीज़ें मुहैया नहीं कराई जातीं.

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