ख़बरें

मेधा पाटकर ने ख़त्म किया 17 दिन लंबा उपवास

तर्कसंगत

August 14, 2017

SHARES

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता और सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने अपना 17 दिनों से चला आ रहा उपवास 12 अगस्त को ख़त्म कर दिया.

मेधा पाटकर नर्मदा नदी पर बन रहे सरदार सरोवर बांध के प्रभावितों के प्रति सरकार की उदासीनता के विरोध में 27 जुलाई से उपवास पर थीं.

नर्मदा बचाओ आंदोलन के कई सहयोगी संगठनों ने मेधा पाटकर से उपवास ख़त्म करने की अपील की थी.

धार जेल के अधीक्षक सतीश कुमार उपाध्याय के मुताबिक मेधा पाटकर ने नींबू पानी पीकर अपना उपवास ख़त्म किया.

मेधा पाटकर इस समय धार की जेल में हैं. इंदौर के बाम्बे अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ घंटे बाद ही 9 अगस्त को उन्हें हिरासत में लिया गया था.

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता संजय पारिख, पश्चिम बंगाल के पूर्व सांसद हन्ना मोला, नेशनल फ़ेडेरेशन ऑफ़ इंडियन वूमेन की एनी राजा, कृषि मुक्ति संग्राम समिति के अखिल गोगोई, वरिष्ठ पत्रकार चिन्मय मिश्र, प्रमोद बागड़ी, सरोज मिश्र समेत कई लोगों की मौजूदगी में मेधा पाटकर ने अपना उपवास ख़त्म किया है.

मध्य प्रदेश पुलिस ने मेधा पाटकर को उस समय गिरफ्तार किया था जब वो चिकाल्दा गांव जा रहीं थीं.

पुलिस ने उन्हें सीआरपीसी की धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया था. ये धारा पुलिस को किसी भी व्यक्ति को वारंट या जज से आदेश लिए बिना गिरफ़्तार करने का अधिकार देती है.

सुप्रीम कोर्ट के चिकाल्दा और आसपास के इलाक़े में धारा 144 लगाने के आदेश का उल्लंघन कर मेधा पाटकर और उनके साथी यहां पहुंच रहे थे.

पुलिस ने मेधा पाटकर को एसडीएम की अदालत में पेश किया था लेकिन उन्होंने ज़मानत लेने से इनकार कर दिया था जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया.

मेधा पाटकर पर इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के कार्य में बाधा डालने और कर्मचारियों को बंधक बनाने जैसे संगीन आरोपों में भी मुक़दमें दर्ज हैं.

नर्मदा बचाओ आंदोलन आदिवासियों, किसानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का एक सामाजिक आंदोलन हैं. इस आंदोलन ने नर्मदा नदी पर कई बड़े बांध बनाए जाने के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई है. नर्मदा नदी मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में बहती है. मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की संस्थापक हैं.

Courtesy: Hindustan Times, NDTV | Image Credit: Hindustan Times

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...