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बाढ़ से बेहाल बिहार की सहमी तस्वीर

तर्कसंगत

August 16, 2017

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बिहार में बाढ़ से13 जिलों में 70 लाख लोग प्रभावित हो गये हैं और अब तक 57 लोगों की गई जान.

आपदा प्रबंधन विभाग की मानें तो प्रदेश के 13 जिले – किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल एवं मधेपुरा बाढ़ से प्रभावित हैं.

बिहार का शोक कही जाने वाली कोसी नदी उफान पर है. कोसी के कहर की वजह से सीमांचल के सात जिलों सहरसा, सुपौल, मधेपुरा व पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार में बाढ़ की स्थिति भयावह है. नेपाल में हो रही मूसलधार बारिश और कोसी बराज से छोड़े जा रहे पानी की वजह से कोसी में उफान जारी है.

बिहार में बाढ़ के बाद की स्थिती कुछ इस प्रकार है:

·बिहार में जो हर साल बाढ़ आती है, उसमें नेपाल से आयी पानी का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. इस बार भी कोशी इलाके में जो बाढ़ आयी है, उसकी सबसे बड़ी वजह नेपाल का पानी ही है.

·अररिया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल, पूर्वी चंपारण, प. चंपारण, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, सीतामढ़ी, दरभंगा, मधुबनी में स्थिति गंभीर है.

·राज्य के सीमांचल के एक दर्जन जिलों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। किशनगंज और अररिया जिले की स्थिति सबसे बदतर हो गई है। दोनों शहर में तीन से चार फीट पानी बह रहा है.

·उत्तर बिहार और बंगाल में बाढ़ के कारण किशनगंज-सिलीगुड़ी-रेल मार्ग ठप हो गया है. इसके साथ ही पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को शेष भारत से रेल संपर्क टूट गया है. कटिहार से सिलिगुड़ी के मध्य रेल ट्रैक पर कई जगह पानी आ जाने की वजह से 18 से ज्यादा रेलगाड़ियों को को रद्द करना पड़ा है.

·लगातार बारिश की वजह से किशनगंज जिले में त्राहिमाम मचा हुआ है. एक तरफ जहां सैकड़ों गांवों में पानी घुस गया है, वहीं शहरी इलाकों में भी दो से 3 फुट पानी भरा हुआ है. किशनगंज के सबसे प्रभावित इलाकों में कोचाधामन, ठाकुरगंज और दिघलबैंक प्रखंड है. प्रभावित लोगों को अपने घर को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है.

·किशनगंज स्टेशन के अलावा अररिया के फारबिसगंज स्टेशन में भी पानी घुस चुका है, जिससे रेल सेवा बाधित है. दिल्ली – गुवाहाटी और कोलकाता – गुवाहाटी मार्ग पर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है.

·मंगलवार को दरभंगा-सीतामढ़ी रेलखंड पर बाढ़ का पानी चढ़ गया जिसके कारण ट्रेन परिचालन बंद कर दिया गया। ट्रेन सेवा दरभंगा की ओर से भी बंद हो जाने के कारण अब सीतामढ़ी जिला का संपर्क ही रेल के माध्यम कट गया है. इसकी वजह से तामढ़ी-मुज्जफरपुर के बीच भी ट्रेन परिचालन भी रुक गया है। वहीं, सीतामढ़ी शहर के भी कई वार्डों में लखनदेई नदी का पानी पसर गया है। इससे कई घरों में पानी घुस गया है। लोग रेलवे ट्रैक पर शरण लिए हुए है.

·अलग अलग मिडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ बिहार में आई भयानक बाढ़ से अब तक 74 लोगों की मौत हो चुकी है. हालांकि आपदा प्रबंधन विभाग ने 41 लोगों की मौत की पुष्टि कर रहा है. इस बाढ़ से 70 लाख से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए है.

बिहार में बाढ़ के पीछे पांच बड़ी वजहें :

1. बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हो रही भारी बारिश है.

2. नेपाल में हो रही बारिश है.

3. बारिश की वजह से नदियां उफान पर हैं.

4. नदियों में पानी भरा तो नेपाल ने अपना पानी छोड़ दिया.

5. बिहार में भारी बारिश से पहले से नदी नालों में पानी भरा था, नेपाल ने पानी छोड़ा तो स्थिति और बिगड़ गई

देश के बाढ़ ग्रस्त राज्यों में बिहार सबसे ऊपर .

देश में बाढ़ ग्रस्त राज्यों में बिहार सबसे ऊपर है , देश में कुल बाढ़ग्रस्त भूभाग में से बिहार की हिस्सेदारी 17.2% है . बिहार के 94.16 लाख हेक्टेयर भूभाग में से 68.80 लाख हेक्टेयर बाढ़ प्रभावित इलाकों में आता है. ·बाढ़ से सबसे ज़्यादा प्रभावित उत्तरी बिहार के इलाके हैं , उत्तरी बिहार का 76% इलाका बाढ़ प्रभावित माना जाता है , जबकि दक्षिणी बिहार के भी 73% इलाके बाढ़ प्रभावित माने जाते हैं ·राज्य के कुल 38 ज़िलों में से 28 ज़िले बाढ़ प्रभावित माने जाते हैं. फिलहाल अभी राज्य के 12 ज़िले बाढ़ की चपेट में हैं.

बिहार का शोक कोसी नदी

·राज्य में कोसी नदी 11410 वर्ग किलोमीटर पर अपना प्रभाव डालती है , जिनमें से 10150.00 वर्ग किलोमीटर का इलाका बाढ़ की ज़द में होता है , बिहार में ये नदी 260 किलोमीटर का सफर तय करती है .

·हिमालय से निकलने वाली कोसी के साथ सात नदियों का संगम होता है, जिसे सन कोसी, तमा कोसी, दूध कोसी, इंद्रावती, लिखू, अरुण और तमार शामिल है. इन सभी के संगम से ही इसका नाम ‘सप्तकोसी’ पड़ा है. कोसी नदी दिशा बदलने में माहिर है. पिछले 200 वर्षो में कोसी ने पूर्व से पश्चिम की ओर 120 किलोमीटर का मार्ग बदला है.

·बरसात के मौसम में नेपाल के तराई वाले इलाकों में भारी बारिश होती है और उस बारिश की वजह से कोसी की सहायक सातों नदियों का जल उफान पर होता है और यहीं से बिहार के बाढ़ का नेपाल कनेक्शन शुरू होता है.

·कोसी नदी नेपाल के हिमालय से निकलकर भीमनगर के रास्ते बिहार में दाखिल होती है. यहां पर कुछ और छोटी नदियों के साथ इसका संगम होता है और आखिर में ये भागलपुर के पास गंगा नदी में मिल जाती है.

·कोसी के मार्ग बदलने से कई नए इलाके प्रत्येक वर्ष इसकी चपेट में आ जाते हैं। बिहार के पूर्णिया, अरररिया, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार जिलों में कोसी की ढेर सारी शाखाएं हैं. कोसी बिहार में महानंदा और गंगा में मिलती है. इन बड़ी नदियों में मिलने से विभिन्न क्षेत्रों में पानी का दबाव और भी बढ़ जाता है.

·बिहार और नेपाल में ‘कोसी बेल्ट’ शब्द काफी लोकप्रिय है. इसका अर्थ उन इलाकों से हैं, जहां कोसी का प्रवेश है. नेपाल में ‘कोसी बेल्ट’ में बिराटनगर आता है. वहीं बिहार में पूर्णिया और कटिहार जिला को कोसी बेल्ट कहते हैं.

·कोसी भले ही बिहार और नेपाल के तराई इलाके में हर वर्ष प्रलय रूपी बाढ़ लाती हो, लेकिन बिहार के मिथिलांचल इलाके में इस नदी के साथ ढेर सारी लोक कथाएं और गीत जुड़े हैं.

PC:HT,Jagran,IndiaToday,India.com

 

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