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मुजफ्फरनगर रेल हादसा: 4 अधिकारी निलंबित,आज से जांच शुरू करेंगे रेलवे सेफ्टी कमिश्नर

तर्कसंगत

August 20, 2017

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मुजफ्फरनगर के खतौली में हुए रेल हादसे के बाद रेलवे ने शुरुआती जांच के बाद बड़ी कार्रवाई की है. कुल 8 अफसरों पर रेलवे की कार्रवाई की गाज गिरी है. उत्तर रेलवे ने हादसे के लिए दोषी मानते हुए 4 अफसरों को निलंबित कर दिया है. कई बड़े अफसरों को छुट्टी पर भेज दिया गया है और साथ ही कुछ का तबादला भी कर दिया गया है. वहीं रेलवे सेफ्टी कमिश्नर शैलेष कुमार पाठक आज घटनास्थल का दौरा करेंगे. पाठक 22 और 23 अगस्त को मामले की जांच करेंगे.

जिन अफसरों को सस्पेंड किया है उनमें दिल्ली डिवीजन के सीनियर डिविजनल रेलवे इंजीनियर आरके वर्मा, दिल्ली डिवीजन मेरठ के असिस्टेंट इंजीनियर रोहित कुमार, मुजफ्फरनगर के सीनियर सेक्शन इंजीनियर इंदरजीत सिंह और खतौली के जूनियर इंजीनियर प्रदीप कुमार शामिल हैं.

रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने रेलवे बोर्ड चेयरमैन को कहा था कि रविवार को हर हाल में ये बताएं कि हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे किसी भी सूरत में रविवार शाम तक इस मामले में जवाबदेही तय करें.

हादसे की गाज कई दूसरे अफसरों पर भी गिरी है जिनमें नॉर्दन रेलवे के GM को छुट्टी पर भेज दिया गया है, दिल्ली रीजन के डीआरएम को भी छुट्टी पर भेजा गया है. इसके अलावा मेंबर इंजीनियरिंग रेलवे बोर्ड भी छुट्टी पर भेजे गए हैं और उत्तर रेलवे के चीफ ट्रैक इंजीनियर का ट्रांसफर कर दिया गया है.

सूत्रों के हवाले से रेलवे की शुरुआती जांच में साफ तौर पर लापरवाही सामने आई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि

हादसे की जगह मेंटेनेंस का काम चल रहा था.
प्रथम दृष्टया ये सही पाया गया कि जरूरी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए थे.
इसके लिए ट्रैफिक ब्लॉक नहीं किया गया था.
इमरजेंसी प्रॉसीजर के तहत काम किया जा रहा था, जिसके लिए 12 सौ मीटर की दूरी पर लाल झंडा लगाया जाना जरूरी था.
झंडा काम वाली जगह से दोनों तरफ लगाया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
मौके पर पहुंची टीम ने रिपोर्ट में बताया है कि मेंटनेस का काम चल रहा था, जिसकी वजह से पटरी को हेक्सा ब्लेड से काटा गया था.
इसकी वजह से नट बोल्ट और फिश प्लेट पटरी से हटी हुई थी.
गैप होने की वजह से 13 डिब्बे पटरी से उतरे और इतना बड़ा हादसा हो गया.

इतनी जल्दी और इतनी बड़ी कार्रवाई से रेल मंत्रालय ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं. लेकिन मारे गए लोगों के लिए पूरा इंसाफ और मुसाफिरों का भरोसा लौटना अभी बाकी है.

पिछले तीन सालों में 206 रेल हादसे – 333 की मौत
• मुज़फ्फरनगर रेल हादसे को छोड़कर , पिछले तीन सालों में ट्रेन डिरेलमेंट के कुल 206 हादसे हुए हैं , जिनमें 333 लोगों की मौत हुई है , 2014-15 में 135 हादसे हुए , 2015-16 में 107 और 2016-17 में 104 हादसे हुए , जबकि इससे पहले 2013-14 में 53 हादसे हुए थे जिनमें  6 लोगों कि मौत हुई थी.

रेल हादसे की वजहों और रेल सुरक्षा पर पार्लियमेंट स्टैंडिंग कमिटी कि रिपोर्ट
•  रेलवे पर गठित संसद कि स्टैंडिंग कमिटी ने 14 दिसंबर, 2016 को रेलवे में सुरक्षा पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी , जिसमें कहा गया था कि 1950 से 2016 के बीच एक ओर रेलवे का रूट किलोमीटर 23% तक बढा, तो दूसरी तरफ दूसरी तरफ उसके यात्री और मालढुलाई में क्रमशः 1,344% और 1,642% की बढ़ोतरी हुई. रेल नेटवर्क के अत्यंत धीमे विस्तार ने इंफ्रास्ट्रक्चर पर अनावश्यक दबाव बनाया है . जिससे  भीड-भाड बढी है और सुरक्षा संबंधी समझौते करने पडे हैं. इसके अलावा रेलवे में पर्याप्तनिवेश न होने के कारण भीडभाड भरे रूट, नई ट्रेनों को शामिल न कर पाना, ट्रेनों कि गति को कम करना और अधिक रेल दुर्घटनाएं जैसे परिणाम सामने आये हैं.
•  आधे से ज़्यादा रेल दुर्घटनाएं रेल कर्मचारियों कि चूक कि वजह से होती हैं , जिनमें काम करने में चूक , मरम्मत का काम ठीक से न करना ,शॉर्टकट को अपनाना , सुरक्षा सम्बन्धी नियमों और कार्यपद्धति कि अनदेखी करना भी शामिल है , कमिटी ने सुझाव दिया था कि प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों के लिए नियमित रेफर्शमेंट कोर्स संचालित किये जाने चाहिए , इस कोर्स में सामान्य गलतियों के कारण होने वाले दुर्घटनाओं कि केस स्टडी , काम करने का पैटर्न , आधुनिकीकरण और तकनिकी उन्नयन शामिल किया जा सकता है
• 2003-04 और 2015-16 के दौरान दुर्घटनाओं में हताहत होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण रेलों का पटरियों से उतरना रहा है . वर्ष  2015-16  में लगभग 84%  फीसदी दुर्घटनाएं रेलों का पटरियों से उतरने कि वजह से हुई . रेल का पटरियों से उतरने कि वजहों में एक बड़ी वजह है पटरियों या रोलिंग स्टॉक कि खराबी . देश में पटरियों कि कुल लम्बाई 1,14,907 किलोमीटर है , जिनमें  4,500 किलोमीटर का हर वर्ष नवीनीकरण किया जाना चाहिए . रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में जहां  5,000 किलोमीटर का नवीनीकरण किया जाना चाहिए था वहाँ सिर्फ  2,700 किलोमीटर  के नवीनीकरण का लक्ष्य रखा गया है.
• कमिटी ने यह टिप्पणी भी की कि लिंक हॉफमैन  बुश (एलएचबी) कोच वाली ट्रेनें पटरियों  से उतरती हैं तो हताहतों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है. इसका कारण यह है कि दुर्घटना कि स्थिति में ऐसे कोच एक के ऊपर एक नहीं चढ़ते

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