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पंचकुलाः उपद्रवियों में अकेली फंसी महिला आईएएस ने शहर को बर्बाद होने से बचा लिया

तर्कसंगत

August 27, 2017

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शुक्रवार को पंचकुला में सीबीआई की विशेष अदालत ने धर्मगुरू बाबा गुरमीत राम रहीम को बलात्कार का दोषी क़रार दिया.

फ़ैसले की जानकारी सार्वजनिक होने के चंद मिनट बाद ही पंचकुला में इकट्ठा बाबा के लाखों भक्तों की भीड़ उग्र हो गई.

पहले से तैयार भीड़ ने पुलिस पर हमला शुरू कर दिया. पंचकुला शहर की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी जिस पुलिस के पास थी उसके जवान पीठ दिखाकर भागने लगे.

पूरा शहर जैसे बाबा के भक्तों के हाथों में आ गया हो. पंचकुला की डिप्टी कमिश्नर 2009 बैच की आईएएस अधिकारी और पूर्व पत्रकार गौरी पराशर जोशी भीड़ के बीच अकेली फंस गईं.

Now, this is called real courage shown by a brave women IAS officer !! We salute you @Gauri Parasher Joshi – DC…

Nai-post ni Rajeev Chandgothia noong Sabado, Agosto 26, 2017

वो गुस्साई भीड़ को समझाने की कोशिश कर रहीं थीं. उपद्रवियों के हाथों में डंडे और पत्थर थे. गौरी पराशर जोशी के साथ मौजूद सुरक्षाबल उन्हें छोड़कर जा चुके थे.

11 महीने के बच्चे की मां जोशी को इन झड़पों में चोटें आईं. उनके कपड़े भी फट गए. उनके साथ सिर्फ़ एक सुरक्षा गार्ड ही रह गया था. इसी हालत में वो अपने ऑफ़िस लौटीं और हालात को सेना के हाथों में सौंपने का आदेश पारित कर दिया.

सेना के हाथों में सुरक्षा की कमान आते ही शहर के हालात और ख़राब होने से बच गए.

एक स्थानीय नागरिक ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया, “यदि सेना बचाव में नहीं उतरी होती तो शहर के रिहायशी इलाक़ों ने अप्रत्याशित बर्बादी देखी होती. हम पिछले कई दिनों से स्थानीय पुलिस की सेवा कर रहे थे, उन्हें चाय-बिस्कुल खिला रहे थे लेकिन जब डेरा समर्थक उपद्रवी हुए तो सबसे पहले पुलिस ही मैदान छोड़कर भागी.”

शुक्रवार को हुआ घटनाक्रम स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है लेकिन इन मुश्किल हालातों में जो हौसला गौरी पराशर जोशी ने दिखाया उसने स्थिति को और अधिक बिगड़ने से बचा लिया.

गौरी उस दिन रात क़रीब तीन बजे अपने घर लौटी. लेकिन इससे पहले उन्होंने शहर के हर नुक्कड़ और चौराहे का जायज़ा लिया.

Source: Economic Times,  The Tribune

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