मेरी कहानी

मैं उससे सबसे ज़्यादा प्यार करता था लेकिन उसे खोने के लिए तैयार था क्योंकि…

Poonam

September 1, 2017

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मैं तब 19 साल का था. वो नवरात्रि के दिन थे जब मैंने पहली बार उसे देखा. देखते ही मैंने अपने कज़िन भाई से पूछा कि क्या उसे जानता है और क्या वो मुझे उससे इंट्रोड्यूस कर सकता है. उसने ऐसा ही किया.

मैंने उससे कहा कि तुम डांस बहुत अच्छा करती हो और हमारी कहानी वहीं से शुरू हुई. उस समय मैं एक कृत्रिम अंग लगाता था. लेकिन मेरा मानना था कि जब ईश्वर तुमसे कोई एक चीज़ ले लेता है तो दस और चीज़ें आपको देने का रास्ता खोल देता है. यही मेरा विश्वास था और आत्मविश्वास भी.

मैंने कभी अपने आप को विकलांग महसूस नहीं किया. हम ऐसे ही डेट करते थे जैसे बाकी लोग करते हैं.

मुझे आज भी याद है जब मैंने पहले बार उससे मूवी देखने के लिए कहा था. उसने जवाब दिया था कि मैं तो कभी घाटकोपर से बाहर ही नहीं गई हूं, मुझे अनुमति नहीं मिलेगी.

तब मैंने उससे कहा कि तुम कहो कि मैं दोस्तों के साथ बाहर जा रही हूं और यही थोड़ा था. मैं उस पर तो कुछ भी खर्च कर सकता था लेकिन मुझे उसके पांच और दोस्तों का भी खर्चा उठाना था.

लेकिन मैं प्यार में इतना डूबा हुआ था कि कुछ फर्क ही नहीं पड़ा. वो पांच दोस्तों के साथ आई और हमने खूब मस्ती की.

90 के दशक का वो दौर था जब स्लिप डिस्क और ब्लू नाइल जैसे पब शहर की जान थे और हमने ख़ूब पार्टी की.

हम दो साल तक डेट करते रहे. फिर उसके परिजनों ने उस पर शादी का दबाव बनाना शुरू कर दिया. हम दोनों एक ही धर्म के थे, एक ही पृष्ठभूमि  के थे लेकिन वो अपनी बेटी को एक विकलांग के साथ ब्याहने के लिए तैयार नहीं थे.

ईमानदारी से कहूं तो, अगर मेरी बेटी ने किसी ऐसे व्यक्ति से शादी करनी चाही होती जिसकी एक टांग न हो तो शायद मैंने भी बिलकुल ऐसे ही सोचा होता. लेकिन यही वो मुश्किल दौर था जब मेरी समझ में आया कि प्यार क्या होता है.

मैं उसके प्यार में पागल था. लेकिन फिर भी मैं उसे खोने के लिए तैयार था. मेरे लिए उसकी ख़ुशी से ज़्यादा कुछ नहीं था, और उस समय मुझे लग रहा था कि यही उसके लिए बेहतर भी है. उसकी ख़ुशी मेरे लिए मेरी ख़ुशी से कहीं ज़्यादा अहम थी.

मैंने उससे बात की और पूछा कि वो क्या करना चाहती है और उसके लिए सही क्या है. उसने इस बारे में सोचा और अपने परिजनों से बात की. उसने उनसे कहा कि अगर मैं किसी से शादी करती हूं और किसी हादसे में वो विकलांग हो जाते हैं तो क्या मैं उन्हें छोड़ दूंगी? मैं उससे प्यार करती हूं और उसी के साथ रहना चाहती हूं.

लेकिन वो राज़ी नहीं हुए. तब मैंने उससे कहा कि मैं सबकुठ ठीक कर दूंगा और तुम्हें हमेशा ख़ुश रखूंगा. हम दोनों के बीच वो छोटी सी बात काफ़ी थी. मैंने उसे उसके घर से लिया और हम दोनों ने आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली. बाकी जो है वो हमारे ख़ुशहाल जीवन का इतिहास है. कुछ महीने बाद उसके परिजन भी हमारे साथ हो गए.

वो फ़ैसला मेरी ज़िंदगी की सर्वश्रेष्ठ फ़ैसला था. मैंने एक हीरे से शादी की है. वो मेरा बहुत ध्यान रखती है. पहले दिन से उसने मुझे स्वीकार किया है और प्यार किया है. वो मुझे उठा रही है. वो पूरा जीवन मुझे उठाती रही है, मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाती रही है.

तो उनके बारे में सबसे अच्छा क्या है?

वो कहती हैं, “वो सबसे समझदार और स्वतंत्र व्यक्ति हैं जिनसे मैं मिली हूं. भले ही उनके एक टांग न हो लेकिन वो पूरा जीवन जीते हैं. हर सप्ताह विदेश जाते हैं, तैराकी करते हैं, टेबल टेनिस खेलते हैं और स्कूबा डाइविंग से लेकर तमाम एडवेंचर स्पोर्ट्स कर चुके हैं. वो एक ज़िंदादिल इंसान हैं.. लेकिन इस सबसे ऊपर वो अपने परिवार को ख़ुश देखने के लिए कुछ भी कर सकते हैं. उनके टांग हो या न हो इससे क्या फर्क पड़ता है. उन्होंने हमेशा मेरी रक्षा की है. हर तरीके से वो सुपरमैन हैं.”

“I was 19 when I first met her during Navratri. I immediately asked my cousin if he knew who she was and to introduce…

Nai-post ni Humans of Bombay noong Biyernes, Agosto 18, 2017

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