मेरी कहानी

उन्होंने मेरी जाति, रंग और रहने की जगह देखी, मेरी कला नहीं

Poonam

September 4, 2017

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“स्कूल के बाद मैं जेजे स्कूल ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स गई. जब मैं पांचवी क्लास में थी तब एक बार एक कला प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वहां कई थी. मुझे अब भी अपने पिता के कहे शब्द याद हैं, ‘ये वो कॉलेज है जहां तुम एक दिन पढ़ना चाहोगी.’ और जब मैं इस कॉलेज में आ गई तो पहले ही दिन हमारे प्रोफ़ेसर ने पूछा, ‘आप जीवन में क्या करना चाहेत हो?’ सबने जवाब दिए, जब मेरी बारी आई तो मैंने कहा कि मैं चाहती हूं कि मेरा उपनाम कवि एक दिन चर्चित हो जाए. मेरे ऐसा कहते ही पूरी क्लास हसने लगी.”

मैं अच्छी मिमिक्री कर लेती हूं. खाली वक्त में मैं अपने सभी प्रोफ़ेसरों की नकल उतारा करती. जब मैं दूसरे वर्ष में थी तब एक प्रोफ़ेसर ने मुझसे कॉलेज के एक कार्यक्रम में मिमिक्री करने के लिए कहा. यह पहली बार था जब मैंने किसी मंच पर प्रस्तुति दी थी. स्टेज पर जाते वक़्त मैं डरी हुई थी. लेकिन फिर मुझे मंच पसंद आने लगा. चौथे वर्ष मे मैंने एक नाटक ‘सेल्फ़ पोर्ट्रेट’ में हिस्सा लिया. इस नाटक को इंटर-कॉलेज प्रतियोगिताओं में कई अवॉर्ड मिले.

जब निर्देशक वीजू माने ने ये नाटक देखा तो उन्होंने मुझे अपने नाटक ‘भीती’ के लिए चुन लिया. इस नाटक ने मुझे अभियन के लिए चार अवॉर्ड दिलवाए. बावजूद इसके मैंने कभी अभिनय को करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा.

कॉलेज पास करने के बाद मैं नई बांबे में एक महिला के लिए काम करती थी. मैं 200 प्रति की दर से टेबल टॉप पेंट किया करती थी. ये मेरे शुरुआती दिन थे और मुझे अपनी कला की क़ीमत पता नहीं थी. बाद में मुझे पता चला कि वो महिला उन टॉप को एक हज़ार रुपए प्रति की दर से बेच रहीं थी. मुझे लगता है कि ये पहली बार था जब मुझे शोषण के बारे में पता चला.

मैंने नौकरी छोड़ दी. 2014 में मैंने ताओ और जहांगीर आर्ट गैलरी में अपनी पेंटिंगों की प्रदर्शनी लगाई. इतनी प्रतिष्ठित गैलरी में अपनी कला का प्रदर्शन कर मैं बेहद ख़ुश थी. लेकिन दुर्भाग्यवश मेरी कोई पेंटिंग नहीं बिकी. इसके बाद मैंने जेवी मैरियट के नज़दीक एक आर्ट गैलरी में अपनी कला की प्रदर्शनी लगाई. एक व्यक्ति मेरी एक पेंटिंग ख़रीदना चाहते थे लेकिन उन्होंने मोल भाव शुरू कर दिया. उन्होंने कैनवास, फ्रेम और रंगों की क़ीमत का अंदाज़ा लगाय और फिर मुझे क़ीमत बताई. इसमें मेरी रचनात्कमका या कला शामिल नहीं थी. मुझे इससे बहुत दुख हुआ. मैंने सारी पेंटिंग को समेटा और ऑटो करके घर चली आई. उस दिन मैंने चित्रकारी की दुनिया को अलविदा कह दिया.

अब मेरा पास करियर के रूप में अभिनय का ही विकल्प था. जो अवॉर्ड मुझे कॉलेज के दिनों में मिले थे वो मुझमें आत्मविश्वास भरने के लिए काफी थे. लेकिन मेरे लिए ये बहुत आसान नहीं था. अभी मेरी परीक्षा पूरी नहीं हुई थी. मुझे अभी भी उस चर्चित मराठी थिएटर प्रोड्यूसर से मुलाकात याद है.

मुझसे बात करने के बाद उन्होंने कहा था कि ये ‘तीन के’ तुम्हारे ख़िलाफ़ हैं. मैं समझ नहीं पाई कि वो क्या कहना चाहते हैं. तब उन्होंने कहा कि सबसे पहले तुम्हारा उपनाम कवि है, तुम ब्राह्मण नहीं हो, दूसरे तो कालवा इलाक़े में रहती हो और तीसरे तुम्हारा रंग है जो काला है.

उन्होंने कहा कि तुम जैसी लड़कियों को शादी कर लेनी चाहिए और आम औरत की तरह जीना चाहिए. अभिनय तुम्हारे लिए नहीं है. रास्ते में घर लौटते वक्त मैं ट्रेन में बैठी रोती रही. मुझे लगा कि अभिनय भी मेरे लिए नहीं है.

इस सब में मेरी मां भी बहुत साथ नहीं दे रहीं थीं. उनका मानना था कि अभिनय करने वाली लड़कियों की शादी आसानी से नहीं होती है. वो शराब पीती हैं, सिगरेट पीती हैं और अपने करियर के अंतिम दिनों में अवसाद में अकेले मर जाती हैं. उन्होंने कभी भी मुझे नाटक के रिहर्सल या ऑडिशन के लिए जाने के लिए पैसे नहीं दिए. मैंने अपना खर्चा निकालने के लिए कमिशन के आधार पर आर्ट प्रोजेक्ट करने शुरू कर दिए. मुझे लगता है कि इसी ने मुझे आत्मनिर्भर होना सिखाया.

मैंने हार नहीं मानी. कहीं न कहीं मैं उन सबको ग़लत साबित करना चाहती थी जो मेरे ख़िलाफ़ थे. इसिलए मैंने लोगों से मिलना और ऑडिशन देना जारी रखा.

शुरुआत को वो दिन बहुत चुनौतीपूर्ण थे. अगर मड आईलैंड में किसी से छह बजे मिलना होता तो मुझे सुबह साढ़े चार बजे घर से निकलना पड़ता. कभी बार घर लौटते वक़्त मेरी आखिरी ट्रेन छूट गई और मुझे स्टेशन पर ही रात बितानी पड़ी. लेकिन अब मुझे लगता है कि संघर्ष के उन दिनों ने ही मुझमें आत्मविश्वास भरा.

अब 6 पेशेवर नाटकों, दस टीवी शो और कई अवॉर्डों के बाद मैं कह सकती हूं कि मैं अपने सरनेम को चर्चित करने का सपना पूरा करने की ओर हूं.

After school, I went to J.J. School of Fine Arts. In 5th grade, I had been there for a drawing competition. I clearly…

Nai-post ni Humans of THANE noong Miyerkules, Agosto 16, 2017

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