मेरी कहानी

मेरी कहानी : मैं टैक्सटाइल इंजीनियर बनने के लिए रिक्शा चलाता हूं

तर्कसंगत

September 7, 2017

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अगर मैंने 2014 में रिक्शा चलाने का काम शुरू नहीं किया होता तो मैं कभी भी अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाता. जब मैं आठवीं कक्षा में था तभी से रिक्शा चलाने लगा. इसी वजह से आज मैं टैक्सटाइल इंजीनयरींग ऑफ गारमेंट डिजायनिंग में डिपलोमा कर रहा हूं.

इस बार मैं सिर्फ 10 दिनों के लिए ईद पर रिक्शा चलाने आया हूं क्योंकि ईद पर लोग खुशी से थोड़ा ज्यादा भी दे देते हैं. जब मैं 10 हजार टाका कमा लूंगा तो वापस फिर से पढ़ाई करने चला जाऊंगा. मुझे 6000 टाका सेमेस्टर की फिस के लिए चाहिए जबकी 4000 कुछ और पढ़ाई के दौरान जरुरतों को पूरा करने के लिए चाहिए. वैसे मेरे संस्थान ने भी मेरी बहुत मदद की क्योंकि जब उन्हें पता चला की मैं रिक्शा चलाकर अपनी फिस भरता हूं तो उन्होंने मुझे 60 फिसदी की छूट दे दी.

मैं अपने पूरे गांव में इकलौता हूं जो अपनी पढ़ाई के लिए गांव छोड़कर शहर में रिक्शा चलाने आया हूं. शुरुआत में मेरे दोस्त मुझपर हंसा करते थे लेकिन जब मैने ये साबित कर दिया की मेरे लिए शिक्षा सर्वोपरी है और स्नातक के बाद मुझे टैक्सटाइल इंजीनियर बनना है तो वही दोस्त मेरे कायल हो गये, उन्हें अब मुझपर गर्व हैं और कुछ तो मेरा अनुसरण करने को भी तैयार हैं.

जब से मैं ढाका जैसे बड़े शहर आया हूं मेरी मां मेरे लिए बहुत चिंतित रहती हैं. वो हमेशा मुझे कॉल करके मेरा हाल पूछती हैं, मैने कुछ खाया या नहीं, मैं क्या कर रहा हूं, मतलब पल पल की जानकारी लेती रहती हैं. ये बातें मुझे कमजोर बनाती हैं. यही कारण है कभी कभी मुझे लगता है की मैं वापस मां के पास घर चला जाऊं. सुबह एक बार बात करने के बाद मैं मोबाइल ऑफ कर देता हूं ताकि मैं कहीं अपने कदम पीछे न ले लूं.

कल ईद थी और मैं देर रात तक रिक्शा चलाता रहा. मुझे अपने मातापिता की बहुत याद आयी क्योंकि ये पहली बार था जब ईद पर मैं उनके साथ नहीं था और मैं अपनी मां के पैर नहीं छू पाया और उनका आशीर्वाद नहीं ले पाया.

Story By- GMB Akash

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