ख़बरें

मिसालः शहीद पति को वर्दी से इतना प्यार था कि अब पत्नी बनी लेफ्टिनेंट

Poonam

September 10, 2017

SHARES

भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा में एक और पन्ना जुड़ गया है. चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी से देश के दो बहादुरों की पत्नियों ने ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स पूरा किया और अपने पतियों की राह पर चलते हुए सेना की वर्दी को स्वीकार किया.

ये वीरांगनाएं हैं कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक और नायक मुकेश दुबे की पत्नी निधि दुबे. जिस बहादुरी के साथ इन दोनों के जीवनसाथी अपने फर्ज की राह में शहीद हुए उसी फर्ज को अब इन वीरांगनाओं ने अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है.

चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी वो संस्थान जहां से देश के बहादुर वर्दी पहनकर निकलते हैं और मरते दम तक अपनी मातृभूमि की रक्षा की शपथ उठाते हैं. इस साल भी ओटीए की पासिंग परेड धूमधाम के साथ हई लेकिन इस साल शहीद कर्नल संतोष महादिक की पत्नी स्वाति महादिक और नायक मुकेश दुबे की पत्नी निधि दुबे पर सबकी निगाह टिकी रही.

कर्नल संतोष महादिक वो वीर थे जो अपनी आखिरी सांस तक फर्ज की राह पर डटे रहे थे.उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा के पास आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए 41 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष महादिक शहीद हो गए थे

कर्नल संतोष महादिक को अपनी वर्दी से बहुत प्यार था और महादिक की इसी मोहब्बत को एक बार फिर पूरा किया उनकी पत्नी स्वाति महादिक ने जो अब स्वाति से अब लेफ्टिनेंट स्वाति हो गई हैं.

स्वाति को सेना में ऑफिसर बनने के लिए एसएसबी की कठिन परीक्षा पास करनी पड़ी. उनके जज्बे को देखते हुए पूर्व रक्षा मंत्री ने उन्हें उम्र में छूट दी थी ताकि वो एसएसबी की परीक्षा में बैठ सकें.

सेना जॉइन करते हुए स्वाति ने बताया कि मेरे पति का पहला प्यार उनकी वर्दी थी, इसलिए मुझे एक दिन तो इसे पहनना ही था. लेफ्टिनेंट स्वाति ने अपने पति की शहादत के बाद सेना में शामिल होने की इच्छा जताई थी.

38 साल की स्वाति महादिक दो बच्चों की मां हैं और आर्मी आर्डिनेंस कोर ने उन्हें सेना में अधिकारी के रूप में शामिल किया.

लेफ्टिनेंट स्वाति ने बताया था कि संतोष कुपवाड़ा में अपनी पोस्टिंग के दौरान स्थानीय युवाओं को सही रास्ते पर रहने और स्कूल जाने के लिए मोटिवेट भी करते थे. वह मानते थे कि आतंकवाद जैसी समस्या का हल शिक्षा से निकलेगा न कि बुलेट से.

लेफ्टिनेंट स्वाति महादिक जैसी ही कहानी है लेफ्टिनेंट निधि दुबे की जिनके पति नाइक मुकेश दुबे की मौत 2009 में ड्यूटी पर हुई थी और अपने पति के सपने को पूरा करने के लिए निधि ने ओटीए ज्वाइन किया.

पति की मौत के दौरान निधि गर्भवती थीं. पति नायक मुकेश दूबे के गुजरने के बाद उनकी जिंदगी मुश्किल हो गई. ससुराल वालों ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया लेकिन निधि ने हिम्मत नहीं हारी.

निधि कहती हैं कि पहले उम्र की वजह से उन्हें परेशानियां होती थीं, लेकिन अब ट्रेनिंग के बाद वो हर वो काम कर सकती हैं जो दूसरा कैडेट कर सकते हैं.

ये देश की वो वीरांगनाएं हैं जिनमें से किसी ने वक्त की चोट को सहा तो किसी ने समाज की आवाजों का सामना किया लेकिन आज जब वर्दी मिली तो हर जख्म,हर सवाल का दर्द खत्म हो गया.

(फोटो-फेसबुक/इंडियन आर्मी)

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...