मेरी कहानी

बस में वो महिलाओं लड़कियों के पहनावे को लेकर बोले जा रहीं थीं, फिर मुझे हस्तक्षेप करना पड़ा

तर्कसंगत

September 12, 2017

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“एक बार मैं बस में यात्रा कर रहीं थी. दो लड़कियां भी थीं जो ऐसा लग रहा था जैसे स्पोर्ट्स प्रैक्टिस करके आ रही हों. उन्होंने शॉर्ट्स के साथ ढीली टी-शर्ट पहनी हुई थी. बस में कुछ महिलाएं ऐसी भी थीं जो उन्हें घूर रहीं थी और उन पर फब्तियां कस रहीं थीं. वो कह रहीं थी कि- इन लड़कियों ने ये कैसी पोशाक पहनी हुई है, कोई ताज्जुब नहीं है कि बलात्कार हो रहे हैं. वो और न जाने क्या क्या कहे जा रहीं थीं.”

“ये सुनकर वो दोनों लड़कियां थोड़ा डर गईं थीं लेकिन वो ख़ामोश ही रहीं. लेकिन जब कुछ ज़्यादा ही हो गया तो मुझे बीच में बोलना पड़ा. मैंने उन महिलाओं से कहा- आप जैसी महिलाओं ही होती हैं जो बलात्कारियों को पालती-पोसती हैं. ये लड़कियां तुम्हारी बेटियां नहीं है इसलिए तुम्हें कोई अधिकार नहीं कि तुम इन्हें बताओ कि इन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं. वो जो चाहे कर सकती हैं और ये उनका अधिकार है. वो जो भी पहनना चाहें ये उनकी व्यक्तिगत पसंद है और तुम लोग इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती हो.”

“तो तुमने इतनी देर तक उनसे बातें की?”

“हां, क्योंकि मुझे बहुत गुस्सा आ गया था. फिर मैंने उनसे कहा कि एक बार जब मैं इस बस से उतर जाउंगी तो तुम मेरे बारे में भी यही सब बोलोगी. लेकिन मुझ पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि न मैं आपको जानती हूं और ना आप मुझे जानती हो. अगर आप मेरी मां या रिश्तेदार होती तो मैं आपके साथ बैठकर बात करती और आपको समझाती. लेकिन आपके साथ मैं बस इतना ही कर सकती हूं.”

“अच्छा, फिर क्या हुआ”

“और फिर में चली आई, वो बच्चियां भी काफ़ी ख़ुश थीं. अब वक्त आ गया है जब हमें इन छोटी छोटी बातों के ख़िलाफ़, जो हमारे समाज में ग़लत हो रही हैं, बोलना होगा. चाहे फिर ये किसी लड़की के साथ हो रहा हो या फिर किसी लड़के के. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. हर किसी की निजी पसंद का सम्मान किया ही जाना चाहिए.”

"Once while I was travelling in a bus, there were these two girls who were coming back from, what looked like, sports…

Nai-post ni Humans Of Kochi noong Biyernes, Setyembre 19, 2014

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