मेरी कहानी

मुझे पूरे सप्ताह शुक्रवार का इंतेज़ार रहता है, इस दिन हमें अच्छा खाने मिलता है

तर्कसंगत

September 26, 2017

SHARES

मैं सोचता हूं कि क्या आज के ज़माने में भी हमारे हाजी साहब जैसे दयालु लोग हैं. मैं अपने पूरे जीवन में उन जैसे किसी व्यक्ति से नहीं मिला हूं.

हर सप्ताह हमें पवित्र जुमे के दिन का इंतेज़ार रहता है. हर शुक्रवार हम अलग अलग जगहों से आकर उनके इस विशेष निमंत्रण में शामिल होते हैं. हम सब शारीरिक रूप से विकलांग हैं और भिखारी हैं.

मैं नोरसिंगड़ी से रेल के ज़रिए आया हूं. पूरी रेल यात्रा के दौरान मैं हमें  आज परोसे जाने वाले खाने की ख़ुशबू के बारे में सोचता रहा.

हर सप्ताह वो हमारे लिए तीन तरह का खाना बनाते हैं. कभी कभी वो बड़ी मछली पकाते हैं सब्ज़ी के साथ. कभीकभी वो मुर्गा या बीफ़ पकाते हैं. हमें खाना खिलाने के बाद हमारे मेज़बान हम सबको यात्रा खर्च के लिए सौसौ टका देते हैं.

हर शुक्रवार को हम दसपंद्रह भिखारी हाजी साहब के घर खाना खाने के लिए इकट्ठा होते हैं. पूरे सप्ताह मुझे शुक्रवार का इंतेज़ार रहता है. इस दिन पहनने के लिए मैं अपने सबसे अच्छे कपड़े बचाकर रखता हूं.

हमने सुना है कि हाजी साहब ने अपना इकलौता बेटा एक सड़क हादसे में खो दिया था. उस हादसे के बाद से पिछले चार साल से हर शुक्रवार को वो हमारी दावत करते हैं.

हम सब खाना खाते हैं और उनके बेटे के लिए दुआ करते हैं. हम दुआ करते हैं कि अल्लाह हाजी साहब के दर्द को कम करे और उनके बेटे को जन्नत दे.

-हाफ़ीजुद्दीन, 70 बरस

I wonder if there are still people like our generous Hazi Saheb. I never met anybody like him in my entire life. Every…

Nai-post ni GMB Akash noong Huwebes, Setyembre 21, 2017

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...