मेरी कहानी

मेरी कहानी : मैं नहीं चाहता था कि कोई भी उन्हें गिेरी निगाहों से देखे जैसे लोग मुझे देखते हैं.

तर्कसंगत

September 29, 2017

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मैने अपने बच्चों को मेरे काम के बारे में कभी कुछ नहीं बताया. मैं नहीं चाहता था कि वो मेरी वजह से शर्मिंदगी महसूस करें. जब मेरी सबसे छोटी बेटी ने मुझसे पूछा की मैं क्या करता हूं तो थोड़ा झीझक कर मैने जवाब दिया की मैं एक मजदूर हूं. घर जाने से पहले मैं सार्वजनिक शौचालय से स्नान कर वापस जाता था ताकि किसी को भी मेरे काम की भनक भी न लगे.

मैं अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजना चाहता था. उन्हें लोगों के सामने पूरे आत्मविश्वास के साथ खड़ा देखना चाहता था. मैं नहीं चाहता था कि कोई भी उन्हें गिेरी निगाहों से देखे जैसे लोग मुझे देखते हैं.  लोग मुझे अक्सर जलील करते थे. लेकिन मैने अपनी कमाई का पाई पाई बेटियों को बेहतर शिक्षा देने में खर्च कर दिया. मैने खुद के लिए कभी एक टीशर्ट भी नहीं ली क्योंकि उन पैसों से  मैं बेटियों के लिए किताबें खरीद लेता था.

मैं बस इज्जत की जिंदगी जीना चाहता हूं और चाहता हूं कि मेरी बेटियां मेरे लिए बस इज्जत कमायें.  मैं एक सफाईकर्मी हूं. मेरी बेटी को कॉलेज में दाखिला लेना था और वो दिन दाखिला लेने की आखिरी तारिख थी. मेरे पास एडमिशन करवाने के लिेए बिल्कुल भी पैसे नहीं थे. चिंता के मारे उस दिन मैं काम भी नहीं कर पाया. मैं कूड़े की ढेर के पास बैठ कर अपनी आंसू छिपाने की कोशिश कर रहा था. मैं हार भी चुका था, मुझे इस बात की पीड़ा सता रही थी कि जब मैं वापस घर जाउंगा और बेटी एडमिशन के लिए पैसे मांगेगी तो किस मुंह से उसे बताउंगा की मेरे पास पैसे नहीं हैं. मैं तो जन्मजात गरीब हूं और मैं ये सोचता हूं कि एक गरीब  के साथ कभी भी अच्छा नहीं हो सकता है.

काम खत्म करने के बाद सभी सफाईकर्मी मेरे पास आकर बैठ गये और मुझसे पूछा कि क्या हमलोगों को अपना भाई मानते हो. इससे पहले की मैं कुछ कहता सभी ने अपने एक दिन की कमाई मेरे हाथ में दे दी. मेरे लाख मना करने के बाद भी वो नहीं माने और उन्होंने कहा की हम भले ही भूखे रह लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सकता की पैसों की कमी की वजह से हमारी बेटी कॉलेज न जाए.

उस दिन मैं बिना नहाये एक सफाईकर्मी की तरह अपने घर गया. बस कुछ ही समय में मेरी बेटी कॉलेज की पढ़ाई खत्म करने वाली है. अब मेरी बेटियां मुझे काम करने नहीं देती क्योंकि एक बेटी पार्ट टाइम जॉब करती है जबकि तीन बेटियां ट्यूशन पढ़ाती हैं. लेकिन अक्सर वो मुझे मेरे काम करने की जगह पर ले जाती हैं जहां मुझे और मेरे सभी साथी सफाईकर्मी को एकसाथ वो खाना खिलाती है. उन सभी ने खुश होकर जब पूछा कि तुम ऐसा क्यूं करती हो तो मेरी बेटी कहती है की आप सभी ने भूखे रहकर मुझे इस लायक बनाया है, बस इतना द इतना दुआ और करो की इस लायक बनूं ताकि आपलोगों के इसी तरह रोज़ खिला सकूं. अब मुझे नहीं लगता की मैं गरीब हूं. जिनके पास भी ऐसे बच्चे हों वो कैसे गरीब हो सकते हैं.

Story- GMB Akash

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