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डीएम ने पेश की मिसाल, स्कूल में टीचर के अभाव में बनाया पत्नी को शिक्षक

तर्कसंगत

October 3, 2017

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सिविल सर्विस की परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना हर उस शख्स के लिए एक सुनहरे सपने जैसा होता है जो दिन रात कड़ी मेहनत से लगातार इसकी तैयारी कर रहा है. वर्षों की कड़ी मेहनत, लगन और दृढ़ता से तैयारी करने के बाद जब सफलता मिलती है तो इसकी खुशी की कोई सीमा नहीं होती

अगर सिविल सर्विस की तैयारी कर रहे उम्मीदवार से आप ये सवाल पूछें की उन्होंने इसी को अपना करियर विकल्प क्यों बनाया तो शायद ही आपको सुसंगत जवाब मिले. वहीं अगर ये माना जाए की सरकारी नौकरी में मिलने वाली सुविधाएं उन्हें इस नौकरी के लिए आकर्षित करती हैं तो शायद उम्मीदवार इस बात से इत्तेफाक न रखें.

आज तर्कसंगत आपको ऐसे शख्सीयत के बारे में बताने जा रहा है जो सही मायने में पूरी मेहनत और समर्पन भाव से जन सेवक है. मंगेश घिल्डियाल और उनकी पत्नी उषा समाज के लिए काम करने वालों के लिए एक मिसाल हैं. समाज में व्याप्त तमाम भ्रष्टाचार और लालफिताशाही के बावजूद ये दंपत्ति एक उम्मीद की किरण हैं .

मंगेश घिल्डियाल अभी रुद्रप्रयाग में जिलाधीकारी हैं. जब वो बागेश्वर में डीएम थे तभी उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मिलकर वहां के लोगों के लिए बहुत काम किये थे. ये उनके काम का ही नतीजा था की जब मंगेश का तबादला हुआ तो सैंकड़ों की तादाद में लोग उनके समर्थन में सड़क पर उतर आये थे.

मंगेश ने 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में चौथी रैंक हासिल की थी. इसके बाद भारतीय विदेश सेवा में जाने का उनके पास मौका था लेकिन देश में रहकर सेवा करने के भाव के कारण उन्होंने इसे ठोकर मार दी और बेहद कम वक्त में ये साबित करके दिखा भी दिया कि वो असल में जन सेवक हैं.

मंगेश लोगों के बीच इसलिए भी मशहूर हैं क्योंकि उन्होंने तमाम सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को बताया और जागरूक किया.

मंगेश की कार्यशैली की पहचान है मौकावारदात का लगातार निरीक्षण करना और शीघ्र कार्रवाई करना. हाल ही में रूद्रप्रयाग के राजकीय इंटर कॉलेज के निरीक्षण में उन्होंने पाया की स्कूल में विज्ञान का शिक्षक नहीं है. वो इस बात को बखूबी समझते हैं कि बोर्ड इग्जाम के दौरान अगर बच्चों का एक दिन भी बर्बाद होता है तो ये उनके लिए एक बड़ी क्षति है.

इस परेशानी से जुझने के लिए उनके दिमाग में एक बहुत ही कमाल का विचार आया. जब तक स्कूल में कोई शिक्षक नहीं रखा जाता उन्होंने अपनी पत्नी उषा को तुरंत प्रभाव से बच्चों को पढ़ाने को कह दिया. उत्तराखंड के पंतनगर विश्वविधालय से उषा प्लांट पैथोलॉजी में डॉक्टरेट सहायक हैं.

उषा को भी इस बात से खुशी हुई और तुरंत ही उन्होंने बच्चों को पढ़ाना शुरु कर दिया और जल्द ही वो बच्चों के बीच लोकप्रिय भी हो गईं.  वैसे आज कल के युवाओं के दिल को जीतना मुश्किल काम है लेकिन उषा ने अपने शांत स्वभाव और अच्ची पढ़ाई के तकनीक से जल्द ही उनको अपना मुरीद बना दिया.

इस तरीके से वहां के स्थानीय लोगों के दिलों पर इस दंपत्ति का राज हो गया.

तर्कसंगत से बात करते हुए मंगेश ने बताया की ये मेरे लिए बेहत संतुष्टि वाली बात है कि लोग मेरे और मेरी पत्नी के काम को पसंद करते हैं. मैं तो सिर्फ अपना काम करता हूं लेकिन लोगों से  मिल रही अच्छी प्रतिक्रिया मुझे औऱ बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है.

तर्कसंगत की टीम इस दंपत्ति को सलाम करती है. जिस तरह से सरकारी महकमा काम करता है उनपर लोग अपनी आंखे ही तरेरते हैं. ये तो मंगेश और उषा जैसे अधिकारियों का कमाल है कि आज भी एक उम्मीद है कि कुछ लोग कितने ही बड़े क्यों न हों वो जमीन से जुड़े लोगों के लिए निसंकोच और बोधड़क होकर काम करते हैं.

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