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मुफ्त में गरीबों की सर्जरी और इलाज करते हैं 80 वर्ष के डॉ योगी एरान

Poonam

October 5, 2017

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वैसे तो डॉक्टर को भगवावन का दूसरा रूप माना जाता है लेकिन डॉक्टर योगी एरोन गरीबों के लिए वाकई में एक मसीहा हैं.  उत्तराखंड के रहने वाले 80 वर्षीय डॉक्टर योगी एरोन अपने इलाके में एक बेहद ही चर्चीत व्यक्ति हैं.  डॉ. एरोन की खासियत ये है की वो आग से जले या झुलस गए मरीजों का फ्री में इलाज करते हैं और जरूरत पड़ने पर उनकी सर्जरी भी करते हैं. वे हर साल लगभग 500 पीड़ितों की सर्जरी करते हैं.

प्रसिद्ध हिल स्टेशन मसूरी जाते वक्त रास्ते में पड़ने वाली इस जगह पर एक चिल्ड्रेन साइंस पार्क भी स्थित है. इसी चार एकड़ में फैले हुए कैंपस में एक छोटा सा अस्पताल भी है जहां डॉ. एरोन बैठते हैं. यहां हर साल डॉ. एरोन के पास हजारों पीड़ित गरीब लोग इलाज करवाने आते हैं. इलाज करवाने वालों में जंगली जानवरों से घायल हुए और आग से जले या झुलसे लोगों की तादाद सबसे ज्यादा होती है. यहां मरीजों का फ्री में इलाज किया जाता है और उन्हें दवाइयां भी फ्री में ही दी जाती हैं.

यहां इलाज के लिए लंबी लाइन लगती है और हर वक्त वेटिंग लिस्ट में पीड़ितों को इंतजार भी करना होता है क्योंकि मरीजों की तादाद काफी ज्यादा होती है. पिछले 11 सालों से डॉ. योगी हर साल दो हफ्ते के लिए मेडिकल कैंप भी लगाते हैं जिसमें अमेरिका से सर्जन की टीम ऑपरेशन करने के लिए आती है. वे एक दिन में कई सारी सर्जरी करते हैं. आपको ये जानकर हैरानी होगी कीद बेटर इंडियाकी रिपोर्ट के मुताबिक अभी लगभग 10,000 मरीज वेटिंग लिस्ट में हैं. इनमें से ज्यादातर लोग हिमालय के इलाके से हैं. डॉ. योगी की अमेरिकी सर्जन टीम में लगभग 15-16 डॉक्टर होते हैं और वे रोजाना 10-12 सर्जरी करते हैं.

डॉ. योगी एरोन का जन्म उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में 1937 हुआ था. अपने पांचवे प्रयास में लखनऊ के प्रसिद्ध किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में उन्हें एडमिशन मिला था. चार साल की मेडिकल डिग्री उन्होंने 7 सालों में पूरी की. पटना के प्रिंस वेल्स मेडिकल कॉलेज से 1971 में प्लास्टिक सर्जरी में स्पेशलाइजेशन भी किया. उस वक्त भारत के अस्पतालों में प्लास्टिक सर्जरी की ज्यादा मांग नहीं थी इस लिहाज से कहीं नौकरी भी मिलना मुश्किल होता था. हालांकि डॉ. योगी को 1973 में देहरादून के जिला अस्पताल में प्लास्टिक सर्जन के तौर पर नौकरी मिल गई थी.

डॉ. योगी अपने उन दिनों को याद करते हुए बताते हैं, ‘मैं भिखारी की तरह रहता था और गधे की तरह काम करता था. मुझे दूसरा काम करने को कहा गया, लेकिन मैंने साफ इनकार कर दिया.अपनी बहन की मदद से वे 1982 में अमेरिका गए और वहां नए डॉक्टरों के साथ उन्हें कुछ एक्सपोजर मिला. उन्होंने इस क्षेत्र में महारत हासिल की. अमेरिका से वापस आने के बाद उन्होंने अपने पिता से कुछ पैसे लेकर देहरादून में कुछ जमीन खरीदी. यहीं पर उनका साइंस पार्क भी बना हुआ है.

उस वक्त देहरादून में किराए के मकान में अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ रहते थे. उन्होंने अपने घर के बाहरी हिस्से को छोटी सी डिस्पेंसरी बना दी. यहां वह सर्जरी को अंजाम देते थे. यहां ज्यादातर मरीज गरीब परिवार से आते थे. जिनमें से कुछ के पास तो डॉ. को देने के लिए पैसे होते थे, लेकिन कई लोगों का इलाज वे फ्री में कर देते थे. घर का खर्च उनके पिता द्वारा दिए गए पैसों से चलता था.

आज भी वे देहरादून में एक छोटे से किराए के मकान में अपनी पत्नी के साथ रहते हैं. उनकी एक बेटी और एक बेटा अमेरिका में रहते हैं. वे कहते हैं कि जलेझुलसे लोगों के पास इलाज के पैसे नहीं होते और अमीर लोग जलते ही नहीं. कई बार डॉ. के पिता ने भी पूछा कि वे फ्री में लोगों का इलाज क्यों करते हैं, तो डॉ. योगी ने कहा कि क्योंकि इससे उन्हें संतुष्टि मिलती है. अपनी जिंदगी के कीमती वर्ष गरीबों और असहायों की सेवा में लगा देने वाले डॉ. योगी के पास न तो पैसे हैं और न ही अपना घर लेकिन उन तमाम गरीबों और पीड़ितों की दुआएं जरूर हैं जिनकी जिंदगी डॉ. योगी ने बचाई है.

तर्कसंगत डॉक्टर योगी एरोन के जज्बे को सलाम करता है.

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