मेरी कहानी

मेरी कहानीः टीचर मेरी दोस्त को बुरी नज़र से देख रहे थे फिर मैंने भी उन्हें बुरी नज़र से देखा

तर्कसंगत

October 6, 2017

SHARES

मैं स्कूल के अपने दोस्तों से काफ़ी अलग थी. मेरे शिक्षक ने मेरे परिजनों को स्कूल बुलाया था ये बताने के लिए कि मैं बाकी सहपाठियों से कितनी अलग हूं. इसकी एक वजह ये भी हो सकती है कि मैं बहुत निर्भीक थी और कुछ भी ग़लत होता हुआ देखकर ख़ामोश नहीं रहती थी.

मेरी एक दोस्त थी जो हर समय डरी हुई और  सहमीसहमी रहती थी. हमारे एक टीचर उसकी ओर ग़लत नज़र से देखते थे. मैंने तय किया कि मैं उन्हें ऐसे ही घूरकर देखूंगी जैसे कि वो मेरी दोस्त को देखते हैं.

उन्हें इतना बुरा लगा कि उन्होंने प्रिंसीपल से हमारी शिकायत कर दी. मैं सोचती हूं कि ऐसे लोगों के दिमाग में क्या चलता है. वो आते तो हमें पढ़ाने हैं और उन पर भरोसा भी इसी काम के लिए किया गया होता है लेकिन अंत में वो मानवता में विश्वास को ही ठेस पहुंचा देते हैं.

बच्चों को आसान शिकार मान लिया जाता है और इसी वजह से बच्चों का यौन शोषण भी होता है.

ये बहुत ज़रूरी है कि स्कूलों में शिक्षक और घर पर परिजन बच्चों को बताएं कि किस तरह से छूना सही है और किस तरह से छूना गलत है.

मुझे इस बात की ख़ुशी है कि मुंबई पुलिस ने पुलिस दीदी कार्यक्रम शुरू किया है जिसके तहत बच्चों को यौन शोषण के बारे में बताया जाता है.

लोग सेक्स एजुकेशन के बारे में बात करते हुए शर्माते हैं और इसी वजह से बच्चों को सही जानकारी नहीं मिल पाती है. और जब ये बच्चे बढ़े होते हैं तब उन्हें सहमती और बहुत सी और चीज़ों की कोई जानकारी नहीं होती है.

एक दोस्त से मुझे ऐसी घटना के बारे में पता चला जिसके बारे में सोचकर मैं उदास हो जाती हूं. तथ्य यह है कि लोग ऐसी बातों पर बस चुप्पी साथ लेते हैं.

एक बार सैट पर एक महिला ने अपने साथ हुई घटना साझा की. कितनी लड़कियां और महिलाएं इस तरह की पीड़ा से गुज़रती हैं. शब्द इस पीड़ा को बयान नहीं कर सकते हैं.

यौन हिंसा की घटनाएं एक व्यक्ति ख़ास कर एक बच्चे को बुरी तरह तोड़ देती हैं. यदि परिजन खुलकर इस विषय पर बात करना शुरू कर दें और बच्चों को यौन हिंसा के बारे में जागरूक करें तो ज़रूर ये पीड़ा कम की जा सकती है.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...