मेरी कहानी

मेरी कहानीः मैं हर दिन अपनी मां से नफ़रत करती थी लेकिन अब…

तर्कसंगत

October 9, 2017

SHARES

मैं हर दिन अपनी मां से नफ़रत करती थी. शायद ही कोई ऐसा दिन जाता है जब मैं उसे बददुआ न देती हूं. मेरे लिए मेरी ज़िंदगी की विलेन वही थी. मुझे लगता था कि शायद वो दुनिया में सबसे कठोर दिल वाली इंसान है. मैं उनसे नफ़रत करती भी क्यों ना, जब मैं सिर्फ़ चालीस दिन की थी तब वो मुझे छोड़कर चली गईं थी. जब मुझे उनकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी तब वो मेरे पास नहीं थीं.

मेरी दादी मां और मेरे पिता मुझे प्यार नहीं करते थे. लेकिन उन्होंने मुझे छोड़ा नहीं. वो मेरी मां की तरह मतलबी नहीं थे. मेरे परिवार के पास मेरी मां की कोई तस्वीर नहीं थी. मैं नहीं जानती थी कि वो कैसी दिखती हैं. बस मुझे इतना पता था कि उनके बाल लंबे और काले थे.

बचपन से ही एक महिला साये की तरह मेरा पीछा करती. स्कूल में, मैदान में, खेत में. कभी-कभी वो मुझे फल और बिस्कुट देती. वो महिला मेरी एकमात्र दोस्त थी. वक़्त बीतता गया. मैं सौलह साल की हो गई. एक दिन मेरे चाचा ने मुझे उसके साथ देख लिया. उन्होंने मुझे उससे छीन लिया. वो पागलों की तरह रो रही थी. मैं बहुत हैरान थी. नहीं जानती थी कि क्या करूं. जब मैं घर वापस आई तो पता चला कि वो महिला ही मेरी मां है.

मुझे ख़ुद से नफ़रत सी हो गई. मैंने उसे अपने पास आने दिया. मैंने अपने चाचा को यह कहकर उसके पास भेजा कि अगर वो मर भी रही होंगी तब भी मैं उन्हें देखने नहीं जाउंगी.

उसकी दूसरी शादी हो गई थी और बच्चे भी हुए. फिर मैं उनके लिए कुछ नहीं रही. लेकिन आगे जो हुआ मैं उसका अंदाज़ा नहीं लगा पाई. चालीस साल बाद जब मेरी मां की मौत हो गई तब उनकी बहन मेरे पास आई. एक पत्र और उस संपत्ति के काग़ज़ थे जो वो मेरे लिए छोड़ गईं थी. तब मुझे पता चला कि इस घर में उनके लिए जीवन कितना मुश्किल था.

मेरे परिवार ने मेरी मां की जान लेने की कोशिश की थी क्योंकि उन्होंने बेटी को जन्म दिया था. मेरी मां से कह दिया गया था कि अगर वो मुझे ज़िंदा देखना चाहती हैं तो उन्हें घर छोड़कर जाना होगा. एक के बाद एक सच मेरे सामने आते गए. लेकिन तब तक बहुत देर हो गई थी. मेरे पिता ने मेरी मां के प्रति जो नफ़रत मुझमें भरी थी मैं उसमें अंधी हो गई थी.

अब मेरे एक अंदर एक तड़प रह गई है. मैं एक बार भी अपनी मां को गले नहीं लगा पाई. एक बार भी उसे मां नहीं बोल पाई.

-सेलीना

I hated my mother everyday. There was not a single day I didn't curse her. For me she was the villain, the person who…

GMB Akash 发布于 2017年10月6日

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...