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लक्ष्मी और विनोद ने ये साबित कर दिया की प्यार दो शरीर नहीं बल्की आत्माओं का मिलन है.

तर्कसंगत

October 13, 2017

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सपनो के राजकुमार की चाहत हर लड़की को होती है लेकिन वो लड़की भाग्यशाली होती है जिसको उसका मन चाहा वर नसीब होता है. चंडीगढ़ की रहने वाली लक्ष्मी उन भाग्यशाली लड़कियों में से एक हैं.

लक्ष्मी के बचपन से ही न दोनों हाथ हैं और न दोनों पांव. उसकी माँ ने कभी सोचा ही नहीं था की कोई उसकी बेटी को अपना जीवनसाथी बनाएगा. लेकिन अगर सितारे बुलंद हो तो बड़ी से बड़ी कमी भी उन सितारों की जगमगाहट में फीकी पड़ जाती है. विनोद के रूप में लक्ष्मी को अपना जीवनसाथी मिला जो उसको बेइन्तहा मोहब्बत करता है विनोद का एक पैर काम नहीं करता. 24 वर्षीय लक्ष्मी बचपन से दिव्यांग हैं और विनोद पोलियो से पीड़ित है लेकिन शारीरक कमज़ोरी कभी दोनों के प्यार के आड़े नहीं आई.

 

पूरे रीति रिवाज़ से तैयार होकर लक्ष्मी ने विनोद के लिए करवाचौथ का व्रत रखा दोनों हाथ न होने के कारण पूजा की थाली और छन्नी वो एक साथ नहीं पकड़ सकती थी, इसलिए विनोद ने पूजा की थाली हाथ में पकड़ी और लक्ष्मी ने छन्नी में विनोद का चेहरा देखकर वर्त पूरा किया.

मुस्कुराते हुए लक्ष्मी कहती हैं कि जीवन में चाहे भगवान ने हाथ-पांव न दिए हो लेकिन उसका जीवन साथी उसकी हर जरूरत को पूरा करता है। लकवाग्रस्त पैरों के कारण वैशाखी से चलने वाले विनोद ने कहा कि पिछले दिनों ही मेरी लक्ष्मी से शादी हुई है.

दोनों की मुलाकात एक मंदिर में हुई थी और दोनों ने डेढ़ साल के आपसी प्यार के बाद शादी की. एक दूसरे का साथ पाकर लक्ष्मी और विनोद खुद को पूरा महसूस करते हैं और जीवन के हर सुख दुःख में एक दूसरे का साथ देते हैं.

लक्ष्मी और विनोद ने ये साबित कर दिया की प्यार दो शरीरों का नहीं बल्कि दो आत्माओं का मिलन है.

source:bhaskar.com

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