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देश में और कितने दाना मांझी, पटना में पिता ने 2 किलोमीटर तक बेटी की लाश को कंधे पर ढोया

तर्कसंगत

October 18, 2017

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बिहार की राजधानी पटना से आयी एक तस्वीर ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार कर दिया है और साथ ही एक लापरवाह और  संवेदनहीन व्यवस्था की भी पोल खोल कर रख दी है. रामबालक नाम के एक आदिवासी को अपनी बेटी की लाश को कंधे पर उठाकर 2 किलोमीटर तक चलना पड़ा क्योंकि सरकारी अस्पताल से उसे एंबुलेंस की मदद नहीं दी गई.

रामबालक पेशे से मजदूर हैं और बहुत ही गरीब हैं वो अपनी बेटी का इलाज कराने के लिए जमुई से मंगलवार को पटना के एम्स पहुंचे. लेकिन बिहार के इतने बड़े अस्पताल में पहुंचने के बाद रामबालक और उनकी पत्नी के साथ जो हुआ उसी वजह से उनकी बेटी की मौत हो गई.

एम्स पहुंचने के बाद वहां खड़े गार्ड ने उन्हें पहले बेटी के इलाज के लिए पंजीकरण कराने के लिए कहा. इतने बड़े अस्पताल में रामबालक को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसे पंजीकरण कहां और कैसे करवाना है. इसलिए बहुत देर तक वो एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भटकता रहा, धक्के खाते रहा और अपनी बीमार बेटी का हवाला देता रहा लेकिन फिर भी कोई डॉक्टर या अस्पताल का कोई कर्मचारी उसकी मदद के लिए सामने नहीं आया.

जब रामबालक को समझ में आया कि पंजीकरण कराने के लिए उसे कौन से काउंटर पर खड़ा होना है तब तक बहुत देर हो चुकी थी. वो वहां जाकर लाइन में लग गया मगर जब तक उसका नंबर आया तब तक ओपीडी का समय समाप्त हो गया था और उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा गया. इसी दौरान रामबालक की बेटी की हालत और बिगड़ गई और कुछ ही देर में अस्पताल के अंदर ही उसकी मौत हो गई.

रामबालक की मुसीबतें अभी कम नहीं हुई थी क्योंकि गरीबी की वजह से अपनी बेटी की लाश को एंबुलेंस से घर ले जाने के लिए उसके पास पैसे भी नहीं थे और अस्पताल ने भी उसकी कोई मदद नहीं की. इसलिए रामबालक ने अपनी बेटी की लाश को अपने कंधे पर उठाया और अपनी पत्नी के साथ 2 किलोमीटर तक चलता हुआ फुलवारीशरीफ टेंपो स्टैंड पहुंचा जहां से किसी तरह वो पटना रेलवे स्टेशन पहुंचा. उसके बाद ट्रेन पकड़ कर अपनी बेटी की लाश के साथ वापस जमुई चला गया.

जब ओडिशा के कालाहांडी से दाना मांझी को अपनी पत्नी की लाश को कंधे पर उठाकर 10 किलोमीटर तक चलना पड़ा था तो एक उम्मीद जगी थी कि शायद इस घटना से प्रशासनिक स्तर पर तो कुछ संवेदना की अलख जगेगी. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर से मानवता को शर्मसार कर दिया है और समाज की संवेदनाहीनता को फिर से जाहिर कर दिया.

PC- Aaj tak

 

 

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