मेरी कहानी

कभी पांच रुपए रोज़ कमाती थीं, अब सालान टर्नओवर करोड़ में

तर्कसंगत

November 3, 2017

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1981 तक मैं सड़कों पर कूड़ना बीनती थी और दिन भर में बस पांच रुपए ही कमा पाती थी.

सूरज निकलते ही मैं काम पर निकल जाती थी. मैं बड़ा टाट से बना बैग लेकर निकलती, लोगों के फेंके गए कूड़े से काम की चीज़ें निकालने में लगी रहती.

मैं दिन भर कबाड़ इकट्ठा करती और शाम को उसे कबाड़ी को बेच देती. पूरे परिवार का पेट मैं ही पाल रही थी.

साल 1981 में ही मेरी मुलाक़ात इलाबेन भट्ट से हुई. वो महिला सहायता समूह सेल्फ़ एंप्लायेड वूमन एसोसिएशन की संस्थापक थी.

उनसे मुलाक़ात ने मेरा जीवन बदल दिया. उन्होंने मुझे महिलाओं की कोआपरेटिव शुरू कर लोगों को स्वच्छता सेवाएं देने का विचार दिया.

शुरुआत में मैंने श्री शौंदर्य सफाई उत्कर्ष महिला सेवा सहकारी मंडली लिमिटेड शुरू की. मेरे साथ कूड़ा बीनने वाली 40 और महिलाएं थीं.

मुझे संस्था का पंजीकरण कराने में पांच साल लग गए क्योंकि हम कोई सामान नहीं बेच रहे थे बल्कि सेवाएं दे रहे थे.

हमे पहला काम नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ डिज़ाइन में मिला. इसके बाद फ़िज़िकल रिसर्च लेबोरेटरी में काम मिला. अहमदाबाद के आईआईएम ने भी हमारी सेवाएं लीं.

आज हमारी संस्था में चार सौ कर्मचारी हैं जिनमें से अधिकतर वो लोग हैं जो पहले कूड़ा बीनते थे. हम अहमदाबाद में पैंतालीस संस्थानों रिहायसी इमारतों को स्वच्छता सेवाएं देते हैं.

यही नहीं वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के दौरान भी हमने अपनी सेवाएं दी हैं. हम अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर ज़ोर देते हैं और उन्हें सफ़ाई के नए तरीके सिखाते हैं.

हमारे साथ काम कर रहीं अधिकतर महिलाएं वो हैं जो पहले कूड़ा बीनने का काम करती थीं. इनके टाट के बोरे अब नए उपकरणों से बदल गए हैं.

वो अब वैक्यूम क्लीनर, हाई जेट प्रेशर, माइक्रो फाइवर मॉप्स, फ्लोर क्लीनर आदि का इस्तेमाल करती हैं.

हमारा अगला उद्देश्य अनपढ़ महिलाओं को तकनीक से जोड़ना है और तकनीक का इस्तेमाल करना सिखाना है. मैं ये सुनिश्चित करना चाहती हूं कि वो ईटेंडर की प्रक्रिया को समझ जाएं.

पैंतीस साल पहले मैं पांच रुपए रोज़ कमाती थी. अब मैं सफ़ाई कर्मचारियों की एक संस्था चला रही हूं जिसका सालाना टर्नओवर एक करोड़ से ज़्यादा है.

ये मेरे अमीर होने की कहानी है.

मैं मानती हूं कि सफलता के लिए मेहनत और नेक नीयत बहुत ज़रूरी है. अगर ईश्वर में आपको विश्वास है तो आप मंज़िलें हासिल कर ही लेंगे.

Submitted By – Pray Bavishi

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