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भारत के स्वच्छ भारत अभियान को यूएन ने कहा ‘नाकाम’

तर्कसंगत

November 15, 2017

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एक और भारत जहां अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है वहीं भारत में हालात बहुत बेहतर नहीं हैं. कम से कम साफ़-सफ़ाई के मामले में तो ये कहा ही जा सकता है.

केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान के बावजूद भारत में अब भी मैला ढोने और मैनुअल स्केन्जिंग जैसी प्रथाएं जारी हैं.

मैनुअल स्केन्जिंग यानि लोगों का गंदगी में उतरकर सफ़ाई करना देश में अभी भी बड़े पैमाने पर जारी है और देश के कई हिस्सों से ज़हरीली गैस के कारण कर्मचारियों की मौत की ख़बरें आती रहती हैं.

संयुक्त राष्ट्र के कार्यकर्ताओं के मुताबिक भारत अभी भी इस प्रथा से मुक्ति नहीं पा सका है. हालांकि भारत सरकार ने संयुक्त राष्ट्र की ओर से की गई आलोचना को खारिज कर दिया है.

साफ़ पानी के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लियो हेलर कहते हैं, “खुले में शौच को ख़त्म करने का मतलब सिर्फ़ शौचालय बनाना नहीं है, बल्कि इसमें व्यवहार में बदलाव की भी ज़रूरत होती है. कम लागत वाली लैट्रीन के लगातार और सुरक्षित इस्तेमाल के लिए साफ़ पानी की व्यवस्था की भी होनी चाहिए.”

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में लाल किले से दिए अपने भाषण पर स्वच्छ भारत अभियान का ऐलान किया था और अक्तूबर 2019 तक देश में खुले में शौच की प्रथा ख़त्म करने का वादा किया था.

अब बस दो साल का समय रह गया है और भारत इस मामले में बहुत ज़्यादा प्रगति नहीं की है.

संयुक्त राष्ट्र के कार्यकर्ताओं के मुताबिक स्वच्छ भारत अभियान मैनुअल स्केन्जिंग की प्रथा को ख़त्म नहीं कर पाया है बल्कि हालात और मुश्किल हो गए हैं क्योंकि शौचालय ड्रेनेज सिस्टम या नालों से नहीं जुड़े हैं.

भारत के कई क्षेत्रों में अभी भी गंदगी साफ़ करने के लिए लोगों को मैनहोल में उतरना होता है. इस काम में अधिकतर दलित समुदाय के लोग ही जुड़े हुए हैं.

भारत में करीब दस लाख लोग अभी भी मैला साफ़ करने की प्रथा में हैं जिनमें से 90 प्रतिशत महिलाओं हैं. ये महिलाएं कई स्थानों पर सर पर रखकर मैला ढोती हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनाए गए शौचालयों को साफ़ करने की ज़िम्मेदारी भी दलित समुदाय के लोगों पर आ गई है और इससे उनके अधिकारों का हनन होता है.

शुक्रवार को जारी एक बयान में लियो हेलर ने कहा है, “शौचालय बनाने पर ज़ोर से मैनुअल स्केन्ज़िंग में लगे लोगों के अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए.”

Source: Dailymail.co.uk

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