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सरकारी अस्पताल में सीएम की बहू, एक बिस्तर पर दो महिला मरीज़

तर्कसंगत

November 16, 2017

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एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अपनी बहू एश्वर्या के लिए एक सरकारी अस्पताल में विशेष प्रबंध करवाया.

मुख्यमंत्री की बहू के सरकारी अस्पताल में भर्ती होने की वजह से अन्य महिला मरीज़ों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

एश्वर्या सिंह को रायपुर के भीमराव अंबेडकर मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें बच्चा होना था.

मुख्यमंत्री की बहू के लिए अस्पताल के पूरे एक फ्लोर को खाली करा लिया गया.

वहीं भाजपा का कहना है कि ये अस्पताल के लिए गर्व की बात है कि मुख्यमंत्री ने अपनी बहू की डिलीवरी के लिए एक सरकारी अस्पताल को चुना.

मुख्यमंत्री के बेटे अभिषेक सिंह राजनंदगांव से सांसद हैं.

उन्होंने अपनी पत्नी को शुक्रवार शाम को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था.

एश्वर्या सिंह को विशेष कमरा दिया गया था जबकि उनकी सुरक्षा की व्यवस्था के लिए तीन अन्य कमरे खाली करा लिए गए थे.

इनमें करीब 50 पुलिस कर्मी ठहरे थे.

एश्वर्या सिंह के अस्पताल में भर्ती होने के समय यहां करीब 1200 मरीज़ भर्ती थे.

दूसरे तल पर भर्ती कई मरीज़ों को पहले तल पर शिफ्ट कर दिया गया था.

अस्पताल के लेबर वार्ड में इतनी भीड़ हो गई की एक एक बिस्तर पर दो-दो महिलाओं को सोना पड़ा.

अस्पताल में दूसरी मरीज़ के साथ बिस्तर साझा करने वाली एक महिला मरीज़ ने कहा, “हम शुक्रवार को भर्ती हुए थे और हमें एक ही बिस्तर मिला. बेड साझा करना बहुत मुश्किल है. हमने उनसे शिकायत की लेकिन किसी ने कुछ नहीं सुना.”

वहीं अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर विवेक चौधरी का कहना था कि अस्पताल में निर्माण कार्य चल रहा है जिसकी वजह से जगह की कमी है.

उन्होंने स्वीकार किया कि अस्पताल में क्षमता से अधिक मरीज़ भर्ती थे.

रमन सिंह अपनी पोती से मिलने के लिए शनिवार को अस्पताल गए.

विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री की बहू को प्राथमिकता दी गई जिसकी वजह से अन्य मरीज़ों को दिक्कत हुई.

विपक्षा का कहना है कि पूरे अस्पताल को छावनी में तब्दील कर दिया गया जिसकी वजह से अन्य मरीज़ों को काफ़ी दिक्कत का सामना करना पड़ा.

इसी साल अगस्त में इसी अस्पताल में ऑक्सीजन की कथित कमी की वजह से चार बच्चों की मौत हो गई थी.

मुख्यमंत्री के अपनी बहू को सरकारी अस्पताल में भर्ती करवाने को लेकर सोशल मीडिया पर ख़ूब चर्चा हुई.

एक वर्ग ने जहां मुख्यमंत्री की बहू को सरकारी अस्पताल भेजने पर तारीफ़ की वहीं बहुत से लोगों ने अन्य मरीज़ों को हई परेशानी की वजह से उनकी आलोचना की.

लेकिन अस्पताल के पूरे एक फ्लोर को मुख्यमंत्री के परिवार के लिए खाली करवा लिया जाना जहां पक्षपात है वहीं ये भी दर्शाता है कि प्रशासन की नज़र में आम मरीज़ों की हैसियत क्या है.

सवाल ये उठता है कि क्या वहां पहले से भर्ती महिला मरीज़ों के कोई अधिकार नहीं हैं और उनका उल्लंघन करने पर क्या कोई कार्रवाई की जा सकती है?

लोकतंत्र में सरकार की नज़र में सब बराबर होते हैं और जनता के पैसे से चलने वाली सरकारी की ज़िम्मेदारी जनता को सेवाएं मुहैया कराना होती है.

लेकिन जब सरकार ही पक्षपात करे तो फिर क्या किया जाए? हम छत्तीसगढ़ सरकार की मरीज़ों को हुई परेशानी के लिए आलोचना करते हैं.

लेकिन क्या सरकार को आलोचना से कोई फर्क पड़ता है?

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