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टीवी मीडिया की अंधराष्ट्रीयता चिंता का विषय

तर्कसंगत

November 20, 2017

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द हिंदू अख़बार के प्रकाशक एन राम ने एक साक्षात्कार में कहा है कि भारत में मीडिया के लिए माहौल बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है.

सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस को दिए एक साक्षात्कार में एन राम ने कहा है मीडिया के लिए माहौल बहुत मुश्किल और चुनौतीपूर्ण है.

उन्होने कहा, “मैं ये नहीं कहूंगा कि मतभेद या विरोध के लिए जगह नहीं है लेकिन तथाकथित बहुसंख्यक के नाम पर सांप्रदायिकता का जो राजनीतिकरण हुआ है वो डराने की कोशिश करता है.”

“सोशल मीडिया का व्यापक रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन फिर भी विपक्ष और मतभेद के लिए भारत में अपनी बात रखने के लिए बहुत जगह है.”

उन्होंने कहा, “अल्पसंख्यक समूहों की भी कुछ प्रवृत्तियां हैं जो विचारों की स्वतंत्रता के लिए ख़तरा पैदा करती हैं लेकिन सबसे बड़ा ख़तरा बहुसंख्यक सांप्रदायिकता से है.”

एन राम ने कहा, “मैं ये नहीं कहूंगा कि बेहद निराशाजनक हो गए हैं. हाल के दिनों में ख़ासकर प्रिंट मीडिया में इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठी है. बहादुर पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने अपनी बात रखी है.”

हालांकि एन राम ये मानते हैं कि हालात ख़राब हुए हैं. उन्होंने कहा कि हालात ख़राब हैं और हमने ऐसे हालातों का पहले भी सामना किया है.

उन्होंने कहा, “भारतीय मीडिया के पास ऐसे हालातों से निबटने की क्षमता और साधन हैं. लेकिन प्रिंट मीडिया और टीवी मीडिया की बात अलग अलग है.”

“टीवी पर अंधराष्ट्रीयता दिखती है. मुझे लगता है कि एनडीटीवी इससे अलग है और इसलिए उसे निशाना बनाया जा रहा है. ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि एनडीटीवी के ख़िलाफ़ एक युद्ध सा चल रहा है.”

“सीबीआई, आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशाल का एनडीटीवी को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया.”

एन राम ने ये भी कहा कि अंग्रेज़ी भाषा के चैनलों ने सरकार के ख़िलाफ़ खड़े होने की हिम्मत नहीं दिखाई है. उन्होंने कहा कि मैं भारतीय भाषाओं के चैनलों के बारे में नहीं कह सकता क्योंकि मैं सबके बारे में बहुत कुछ नहीं जानता लेकिन अंग्रेज़ी भाषा के चैनल मज़बूती से खड़े नहीं हो पाए हैं.

उन्होंने कहा, “इन चैनलों पर जो अंधराष्ट्रीयता चल रही है वो चिंता का विषय है.”

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