ख़बरें

पिता के बाद दो किसान भाइयों ने भी की आत्महत्या

तर्कसंगत

November 20, 2017

SHARES

पंजाब में दो किसान भाइयों ने भाखड़ा नहर में कूदकर जान दे दी. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक ये घटना 17 नवंबर की है.

40 वर्षीय रूप सिंह और 32 वर्षीय बसंत सिंह फ़तेहगढ़ साहिब के जरखेला खेड़ी गांव के रहने वाले थे.

सब इंस्पेक्टर अमरीक सिंह के मुताबिक दोनों के पास ढाई एकड़ ज़मीन थी और 30 एकड़ ज़मीन उन्होंने ठेके पर ले रखी थी.

ख़राब उपज की वजह से वो ज़मीन के ठेके की राशि नहीं चुका पाए थे. दोनों किसान भाइयों के पिता अवतार सिंह ने भी साल 2008 में क़र्ज़ की वजह से आत्महत्या कर ली थी.

प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती लागत और सही बाज़ार भाव न मिलने की वजह से बीते कुछ सालों में भारत में किसानों की हालत खस्ता हुई है.

किसानों की एक बड़ी समस्या ये भी है कि ज़्यादातर किसान आय के लिए सिर्फ़ खेती पर निर्भर होते हैं.

ऐसे में फ़सल बर्बाद होने, मौसम की मार पड़ जाने या सही दाम न मिलने पर किसानों के लिए गुज़ारा करना मुश्किल हो जाता है.

किसानों की आत्महत्याएं भारत में कितनी विकराल समस्या हैं इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि एक जुलाई के बाद से महाराष्ट्र में 1254 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

इसी दिन राज्य सरकार ने किसानों का 34 हज़ार करोड़ रुपए का क़र्ज़ माफ़ किया था.

इस साल 31 अक्तूबर तक राज्य में 2414 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

वहीं पूरे भारत में बीते कुछ सालों में किसानों की आत्महत्याओं के मामलों में 42 फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

1995 के बाद से अब तक तीन लाख से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं. इस दौरान 90 लाख से अधिक लोग खेतीबाड़ी छोड़ चुके हैं.

सबसे ज़्यादा किसान आत्महत्याएं महाराष्ट्र में होती हैं जिसके बाद तेलंगना और कर्नाटक का नंबर है.

किसान अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं के मुताबिक राज्य किसानों की आत्महत्या पर पूरा आंकड़ा नहीं देते हैं और वास्तविक संख्या और भी बहुत ज़्यादा हो सकती है.

किसान आत्महत्या के कुल मामले में 10 में से 8 किसान बैंकों से लिए गए कर्ज की वजह से आत्महत्या करते हैं.

एक अनुमान के मुताबिक आम किसान परिवार प्रति माह 6426 रुपए कमाते हैं और 6223 रुपए खर्च करते हैं.

अपने परिवारों को दो वक्त की रोटी खिलाने के लिए संघर्ष कर रहे किसानों के लिए कर्ज़ चुकान दूर की कौड़ी साबित होती है.

अब पंजाब के दो किसान भाइयों की आत्महत्या के इस मामले ने एक बार फिर किसानों को मुद्दे को रेखांकित किया है.

भारत में किसान कितने अपेक्षित है इसका अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि सोमवार को दिल्ली में हज़ारों किसानों ने प्रदर्शन किया लेकिन उन्हें मीडिया तो क्या सोशल मीडिया में भी जगह नहीं मिल सकी.

अपने विचारों को साझा करें

संबंधित लेख

लोड हो रहा है...