मेरी कहानी

मेरी कहानीः मैं भूखी रहती थी, घंटों पैदल चलती थी, आज मेरी बेटी डॉक्टर और बेटा इंजीनियर है

तर्कसंगत

November 26, 2017

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बीस साल पहले जब मैं ढाका आई थी तब मेरी बेटी छह साल की थी, बड़ा तीन साल का था और छोटा बेटा सिर्फ़ पांच महीने का था.

मैं कभी अपने ऊपर एक पैसा ख़र्च नहीं किया. मैं बच्चों के घरों में जाकर उन्हें गणित की ट्यूशन पढ़ाती थी. मैं मीलों पैदल चलकर एक घर से दूसरे घर जाती थी.

कई बार तो एक दिन में ही मुझे आठ किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता था. मैं रोज़ाना सुबह छह बजे घर से निकलती और कई बार घर पहुंचने में रात के 11 बज जाते थे.

मैं इस दौरान यातायात के किसी साधन का इस्तेमाल नहीं करती थी. बाहर कुछ भी नहीं खाती थी ताकि अपने बच्चों की शिक्षा के लिए पैसे बचा सकूं.

सारा दिन काम के बाद मैं शारीरिक और मानसिक तौर पर बेहद थक जाती थी लेकिन बावजूद इसके मैंने अपने सपने को ज़िंदा रखा.

जब मैं सिर्फ़ तेरह साल की थी तब मेरे पिता की मौत हो गई थी. मैं परिवार के बड़ी बेटी थी इसलिए पूरे परिवार का ध्यान रखने की ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई.

मैं खेतों में काम करती थी. लेकिन मैंने अपनी पढ़ाई जारी रखी. मैंने हमेशा अपने बच्चों को अपने संघर्ष के बारे में बताया है. मैंने उन्हें बताया कि उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए मुझे कितनी मेहनत करनी पड़ी.

मेरी बातें सुनकर वो हमेशा मुझे उम्मीद देते कि एक दिन वो मेरे सपने ज़रूर पूरे करेंगे. मेरे बच्चों हमेशा से पढ़ाई में मन लगाते थे. उन्होंने कभी कोई मांग नहीं की और बेहद सादगी से जीते थे.

चार साल पहले मैंने अपनी कमाई से दवाई की दुकान खोली है. अब मैं घर घर जाकर ट्यूशन नहीं पढ़ाती हूं. इस दवा की दुकान से होने वाली कमाई से मैं घर चलाती हूं.

अब मेरी बेटी डॉक्टर है और मेरा बड़ा बेटा मेकेनिकल इंजीनियर है. मेरी मेहनत और लगन ने मेरे सपने को पूरा कर दिया.

अगर सभी औरतें काम करना शुरू कर दें तो गरीबी ख़त्म हो जाएगी. महिलाएं सिर्फ़ अपनी ज़िंदगी को ही नहीं बल्की पूरे समाज को भी बदल सकती हैं. मैं अल्लाह से यही दुआ करती हूं कि मेरी मौत काम करते हुए ही हो.

राक़ीबा अख़्तर, 47 वर्ष

My daughter was 6 years old, my elder son was 3 and a half years old and my younger son was only 5 months old when I…

Geplaatst door GMB Akash op vrijdag 8 september 2017

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