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अफ़राज़ुल को शंभूलाल ने मारा या हम सबने?

Poonam

December 7, 2017

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राजस्थान के राजसमंद ज़िले में एक कट्टरवादी हिंदू कार्यकर्ता शंभूलाल ने पश्चिम बंगाल से आए प्रवासी मज़दूर मोहम्मद अफ़राज़ुल पर पहले धारधार हथियारों से हमला किया और फिर रहम की भीख मांग रहे अफ़राज़ुल को आग के हवाले कर दिया.

शंभूलाल ने सिर्फ़ अफ़राज़ुल की हत्या ही नहीं की बल्कि ख़ौफ़ पैदा करने के लिए उसने घटना का वीडियो बनाया और साझा किया.

इसके बाद शंभूलाल ने दो और वीडियो बनाए. मंदिर में रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में उन्होंने हत्या की ज़िम्मेदारी ली.

भगवा ध्वज के आगे रिकॉर्ड किए गए एक अन्य वीडियो में शंभूलाल ने लव जेहाद और इस्लामिक जेहाद के ख़िलाफ़ भाषण दिया.

घटना के वीडियो की ख़बर ने सभी चौंका दिया. जिसने वीडियो देखा वो सदमे में आ गया.

राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया इससे पहले हुए इस तरह के हमलों का किसी न किसी रूप में बचाव करते रहे थे लेकिन इस बार वो भी बैकफुट पर थे.

उन्होंने हमले की निंदा करने और हमलावर को वहशी कहने में देर नहीं लगायी.

उस मुसलमान मजदूर को जिसे मारा गया ,जिसे जिंदा जलाया गया दरअसल वो कोई और नहीं था हम और आप थे। उसकी चीख हमारी चीख थी। उसका…

Posted by Vikram Singh Chauhan on Thursday, December 7, 2017

राजस्थान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष ने तो यहां तक कह दिया कि इस घटना के बाद इंसान जानवरों की नज़रों में भी गर गया है.

सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले अधिकतर लोगों ने शंभूलाल को वहशी दरिंदा कहा. लेकिन क्या बात शंभूलाल को वहशी दरिंदा कहकर ख़त्म हो जाती है?

अभी तक इस तरह के हत्या के वीडियो मध्यपूर्व में इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण वाले इलाक़ों से आते थे.

अपहरण किए गए लोगों का क़त्ल करके वीडियो जारी करने वाले जेहादी जॉन और शंभूलाल में क्या फर्क है?

सिर्फ़ यही कि जेहादी जॉन के पीछे एक घोषित आतंकवादी संगठन खड़ा है लेकिन शंभूलाल के पीछे जो लोग हैं उनकी पहचान अभी नहीं हुई है.

यह यह कि जेहादी ज़ॉन घोषित आतंकवादी है और शंभूलाल आम लोगों के बीच रह रहा एक आम आदमी?

लेकिन क्या अफ़राज़ुल की मौत के लिए सिर्फ़ शंभूलाल ही ज़िम्मेदार है या इसमें हमारी भी कोई भूमिका है?

सच बात तो ये है कि ये सवाल ही बेमानी है क्योंकि इसमें हमारी स्पष्ट भूमिका है और अब हम उस ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते.

हम जब भी सोशल मीडिया पर नफ़रत भरी पोस्ट शेयर करते हैं हम कोई न कोई शंभूलाल तैयार कर रहे होते हैं.

जब हम एक प्रेमीप्रेमिका की शादी को लव जेहाद की संज्ञा दे देते हैं तब हम एक शंभूलाल तैयार कर रहे होते हैं.

जब हम राजनीति में धर्म को सर्वोपरि कर देते हैं, धर्म अनुष्ठानों को सत्ता का हिस्सा बना देते हैं तब भी शंभूलाल तैयार कर रहे होते हैं.

शंभूलाल किसी अफ़राज़ुल की जान लेने वाला कोई एक व्यक्ति नहीं है बल्कि एक सोच है जो लगातार दिन ब दिन और मज़बूत हो रही है.

हमने ही इसी सोच को बढ़ावा दिया है और अब इसे ख़त्म करने की ज़िम्मेदारी भी हम पर ही है.

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