सप्रेक

सप्रेकः पुराने सामान से नया भवन बना बुजुर्गों के लिए बना दिया शानदार आशियाना

तर्कसंगत

January 4, 2018

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केरल के मलपल्ली के रहने वाले बीजू अब्राहम को नौकरी के सिलसिले में लंबा वक़्त केरल के बाहर ही गुज़ारना पड़ा.

वो जब भी छुट्टियों में अपने घर लौटते तो उन्हें अजीब पीड़ा घेर लेती. दरअसल उनके गांव के अनेक बुज़ुर्गों को देखने वाला कोई नहीं था. वो बिना किसी देखभाल के एकाकी जीवन व्यतीत करने को मजबूर थे.

बीजा अब्राहम हर बार जब छुट्टियों से लौटते तो यही सोचते कि एक ना एक दिन अपने गांव के इन बेसहारा बुज़ुर्गों के लिए कुछ करेंगे.

Geplaatst door OOR – Abraham's Homeland Integrated Support Systems for Healthy Ageing op donderdag 2 maart 2017

 

लेकिन फिर वो अपनी नौकरी में व्यस्त हो जाते और गांव के बुज़ुर्गों के लिए कुछ करने का ख़्याल पीछे छूट जाता.

केरल के समाज में परिवार के बुज़ुर्गों के अलग रहने का चलन नहीं हैं. आमतौर पर जीवन के अंतिम दिनों में लोग परिवार के साथ ही रहते हैं.

लेकिन मांबांप को गांव में छोड़कर शहर में नौकरियां करने का चलन यहां भी पहुंच गया है. ऐसे में बड़ी तादाद में बुजुर्ग अकेले रह गए हैं.

बीजू अब्राहम दो साल पहले अपने गांव लौटकर अपने मातापिता के साथ रहने का फ़ैसला किया. साथ ही उन्होंने गांव के बुज़ुर्गों के लिए कुछ करने की दिशा में क़दम भी आगे बढ़ा दिए.

बीजू अब्राहम ने अपने गांव के आसपास की चौबीस जर्जर और पुरानी इमारतों को नीलामी में ख़रीदा.

Geplaatst door OOR – Abraham's Homeland Integrated Support Systems for Healthy Ageing op donderdag 2 maart 2017

 

बीजू अब्राहम ने इन पुराने भवनों को तोड़कर रॉ मैटिरियल इकट्ठा किया और नए भवन के निर्माण में इसी को लगाया.

पुराने मकानों की ईंटें, लकड़ियां और लोहा निकालकर अलग कर लिया गया और इसे नए शानदार भवन के निर्माण में लगाया गया.

यही नहीं उन्होंने नए विशाल भवन के निर्माण के लिए एक भी पेड़ न काटने का भी निश्चय किया.

दरअसल बीजू अब्राहम ने ठान लिया था कि जब वो बुजुर्गों के लिए ओल्ड एज होम बनाएंगे तो पर्यावरण को कोई नुक़सान नहीं पहुंचाएंगे.

आसपास के लोगों ने बीजू अब्राहम को चेताया कि पुराने सामान से भवन बनाएंगे तो वो बहुत टिकाऊ नहीं होगा. लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी और पुरानी ईंटों, लोहे और लकड़ियों से ही निर्माण कराया.

बीजू अब्राहम ने अपने ओल्ड एज होम में कुल पंद्रह कमरे बनाए हैं. इसके अलावा बुजुर्गों की सेवा के लिए तमाम सुविधाएं यहां मुहैया कराई गई हैं.

Geplaatst door OOR – Abraham's Homeland Integrated Support Systems for Healthy Ageing op donderdag 2 maart 2017

अब न सिर्फ़ बीजू के गांव के लोग बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं.

यही नहीं कुछ लोगों ने तो उनकी तरह ही अपने गांव में भी बुजुर्गों के लिए भवन बनाने की बात कही है.

बीजू कहते हैं कि हालात बेहतर करने के लिए हमें सिर्फ़ दूसरों से उम्मीद नहीं करनी चाहिए बल्कि स्वयं भी क़दम उठाना चाहिए.

बीजू अब्राहम अब मलपल्ली के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं.

उन्होंने न सिर्फ़ बुजुर्गों की देखभाल बल्कि पर्यावरण को बचाने का भी संदेश दिया है.

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