मेरी कहानी

मेरी कहानीः दो साल लगे और हमारे घर वाले शादी के लिए मान ही गए

तर्कसंगत

January 9, 2018

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प्यार करना दुनिया की सबसे ख़ूबसूरत, सबसे सुक़ून देनी वाली और सबसे डरावनी चीज़ है जो आप करते हैं.

जब आपको किसी से प्यार हो जाता है तब आप उनके बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकते हैं.

मैं उनसे अपने गांव के पास उसी तालाब के किनारे मिली थी जहां मैं बचपन से नहाने जाती रही थी. जब मैंने पहली नज़र उन्हें देखा तब ही प्यार हो गया था.

ऐसा नहीं था कि मैं उन्हें बस पसंद करती थी बल्कि मुझे लगता था कि मैं उन्हें प्यार करती हूं और यही वो आदमी है जिसके साथ मैं सारा जीवन रहना चाहती हूं.

मैं बहुथ शर्मीली थी और उलझन में भी थी. मैं जिन हालात से गुज़र रही थी उनके बारे में किसी को बताने को लेकर भी उलझन में थी.

लेकिन हर पल मुझे ऐसा लगता कि मेरे जीवन में कोई कमी है. मैं हर पल उनकी कमी महसूस करती थी. मैं जहां जाती, जो कुछ भी करती, बस उनकी कमी महसूस होती.

बिना किसी वजह के मैं सड़क किनारे की उस दुकान पर ग़ैर ज़रूरी सामान ख़रीदने जाने लगी थी. यहां तक कि दिन में दो तीन बार नहाने जाती कि उनका दीदार हो जाए.

मुझे वो दिन याद है जब मैं नहाकर लौटी थी और मां के साथ दोपहर का खाना खा रही थी. तब उन्होंने कहा था कि मुझे लगता है कि तुम बीमार हो और तुम्हें अस्पताल ले चलना चाहिए. तुम दिन में इतनी बार नहाने क्यों जा रही हो, ये सामान्य बात नहीं है.

मैं मां की बात सुनकर इतनी ज़ोर से हंसी की खाना भी पूरा नहीं खा पाई. मेरी मां की उलझन और बढ़ गई.

मैं अपने आप से कह रही थी कि हां मैं बीमार हूं, बीमार हूं उसके लिए जिसे मैं प्यार करती हूं. मुझे नहीं मालूम कि वक़्त कैसे बीता. वो छह महीने किसी सपने जैसे थे.

उसके सिवा सबको पता था कि मैं उसे प्यार करती हूं. मैं सोचती रहती कि ये कैसे संभव है कि उसे पता ही न हो कि मैं उसे कितना प्यार करती हूं.

एक दिन स्कूल से लौटते वक़्त मैं उन्हें  दुकान में खोज रही थी लेकिन वो कहीं नहीं थे. अचानक वो पीछे से आए और बोले क्या तुम मुझे खोज रही है.

मैंने कोई जवाब नहीं दिया, मैं बस उनका ख़ूबसूरत चेहरा देखकर हंसती रही.

एक साथ होने के लिए हमें बहुत लड़ाइयां लड़नीं पड़ी. मेरे पिता ने अपनी छोटी बहन से वादा किया था कि मेरी शादी उनके बड़े बेटे से होगी.

लेकिन मुझे मेरे शैफ़ुल से प्यार हो गया था और हम दोनों प्यार में पागल थे. उसने कई बार मुझसे कहा कि साथ भाग चलते हैं. लेकिन मैं भागना नहीं चाहती थी.

मैं अपने घर की बड़ी बेटी थी. मैं प्यार में पागल थी लेकिन मुझे अपने परिवार की ज़िम्मेदारियों का भी अहसास था. मैंने उससे वादा किया कि चाहे जो हो जाए मैं उसकी ही रहूंगी लेकिन मैं घर से भागूंगी नहीं.

मैंने कहा कि कोई भी अपने मांबाप की दुआ के बिना सुखी नहीं रह सकता है. उसने मुझ पर भरोसा बरकरार रखा.

मैं अपने घरवालों की मर्ज़ी से उनकी दुआएं लेकर शादी करना चाहती थी. हमें अपने परिवारवालों को मनाने में दो साल लग गए.

कई परेशानियों और इम्तेहानों के बाद आख़िरकार हमारे घरवाले मान ही गए और हमारी शादी को मंज़ूरी दे दी.

हमने अपने जीवन में बस यही बात सीखी है कि अगर तुम किसी चीज़ को चाहोगे तो अल्लाह उसे तुम्हें ज़रूर देगा. बस तुम्हें अपनी उम्मीद का साथ नहीं नहीं छोड़ना है.

इसलिए ही मैंने अपनी बेटी का नाम इच्छा रखा है. वो सिर्फ़ 25 दिन की है. हम उपनी बेटी के लिए बहुत ख़ुश हैं.

हमने अल्लाह से बेटी ही चाही थी और हमें बेटी मिल गई. अल्लाह हमेशा हमारे साथ हैं और हम उसके शुक्रगुज़ार हैं.

बिलकीस और शैफ़ुल

Falling in love is one of the most beautiful, rewarding and scariest things you could ever do. When you fall for…

Geplaatst door GMB Akash op woensdag 27 december 2017

 

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