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शर्मनाक़ः ‘बदसूरती’ ने ख़त्म की दो ख़ूबसूरत ज़िंदगियां

Poonam

January 11, 2018

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हमारे समाज ने ख़ूबसूरती के जो मानक स्थापित कर रखें हैं उनमें फिट न बैठने वाली दो युवतियों ने आत्महत्या कर ली है.

एक तेलंगना के संगारेड्डी ज़िले के एक स्कूल में पढ़ने वाली 14 वर्षीय छात्रा थी. दूसरी दिल्ली के एक पीजी में रहकर आईएएस की तैयारी करने वाली एक 27 वर्षीय छात्रा.

ये दो ज़िंदगियां सिर्फ़ इसलिए ज़ाया हो गईं क्योंकि इनके इर्दगिर्द रहने वाले लोग इन्हें ख़ूबसूरत नहीं मानते थे.

संगारेड्डी के डोमाडूगू गांव के प्रगति हाईस्कूल में पढ़ने वाली लवण्या के सहपाठी उसकी कथित बदसूरती के लिए मज़ाक बनाया करते थे.

स्थानीय पुलिस के मुताबिक चेहरे के काले रंग की वजह से स्कूल में लवण्या का मज़ाक बनाया जाता.

रोज़-रोज़ के तानों से तंग आकर लवण्या ने स्वंय को आग के हवाले कर दिया.

अपने सुसाइड नोट में उसने बदसूरत होने की वजह से मज़ाक बनाए जाने को जान देने का कारण बताया है.

लेकिन इससे पहले भी लवण्या ने जान देने की कोशिश की थी और इस बारे में अपने प्रिंसीपल को भी बताया था.

स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 30 दिसंबर को तानों से आहत लवण्या ने ब्लेड से अपनी नस काटने की कोशिश की थी. लेकिन बाद में इस बारे में उसने प्रिंसीपल से बात करने का फ़ैसला किया और अगले दिन प्रिंसीपल को पूरी बात बता भी दी.

लेकिन मरते वक़्त जज को दिए बयान में लवण्या ने कहा है, “प्रिंसीपल ने मुझसे ही पूछा कि मैंने ऐसा क्यों किया. जब मैंने बताया कि मैंने अपनी जान देने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि मैं मेंटल या पागल तो नहीं हूं. लेकिन उन्होंने मेरी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया.”

लवण्या ने अपने सहपाठियों पर भी शर्मनाक ताने मारने के आरोप लगाए हैं.

स्थानीय पुलिस के मुताबिक प्रिंसीपल और स्कूल प्रशासन के उसकी बात को गंभीरता से न लेने के बाद लवण्या ने दो जनवरी को अपने आप को आग के हवाले कर दिया.

उसे इलाज के लिए हैदराबाद लाया गया था जहां उसने सोमवार को दम तोड़ दिया.

ऐसी ही एक घटना दिल्ली के नेहरू विहार में भी हुई है.

02 जनवरी को हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के तीमारपुर के पास नेहरू विहार इलाक़े में एक पीजी में रहकर सिविल सेवा की तैयारी कर रही 27 वर्षीय छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली.

पुलिस के मुताबिक छात्रा ने अपने सुसाइड नोट में आत्महत्या की वजह अपने चेहरे की बदसूरती को बताया है.

लड़की ने अपने नोट में ये भी कहा है कि आत्महत्या के लिए सिर्फ़ वो ही ज़िम्मेदार है, और कोई नहीं.

लेकिन क्या लड़की के ये लिख देने भर से बात पूरी हो जाती है. क्या वाक़ई में आत्महत्या के लिए सिर्फ़ वो स्वयं ही ज़िम्मेदार है? क्या इसमें हमारे समाज और बाज़ार की कोई भूमिका नहीं है?

ऐश्वर्या राय और मानुषी छिल्लर के सौंदर्य का जश्न मनाने वाले इस देश में ख़ूबसूरती एक बड़ा बाज़ार है जहां गोरेपन की क्रीमें ख़ूब बिकती हैं.

स्थानीय अख़बार को ज़िला संस्करणों के पन्ने गोरे करने का दावा करने वाले इश्तेहारों से भरे रहते हैं.

गोरे रंग को ख़ूबसूरती का मानक मान लिया गया है. कम गोरे या ज़रा काले लोगों को हर मोड़ पर हीन भावना का शिकार होना पड़ता है.

हो सकता है हममें से बहुत से लोग अपनी जान देने वाली इन लड़कियों को कायर कहकर बात ख़त्म करना चाहें, लेकिन क्या इन्हें कायर कह देने भर से ये बात ख़त्म हो जाएगी?

स्रोतः द न्यूज़ मिनट, हिंदुस्तान टाइम्स

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