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मोदी सरकार के काल में बदतर हुई भारतीयों की हालतः फ़ोर्ब्स

तर्कसंगत

January 23, 2018

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशों में विदेशियों के ये बताने में कम समय बिताना चाहिए कि भारत कितना बेहतरीन काम कर रहा है बल्कि उन्हें अपने देश में लोगों के बीच अधिक समय बिताकर उनसे पूछना चाहिए कि वो उनकी सरकार के बारे में क्या महसूस करते हैं.

ये शब्द फ़ोर्ब्स पत्रिका में प्रकाशित उस लेख से हैं जिसमें बताया गया है कि बीते तीन सालों में भारतीय की हालत ख़राब हुई है.

गैलप सर्वे के हवाले से फ़ोर्ब्स ने कहा है कि भारतीयों को लगता है कि मोदी सरकार में उनकी हालत ख़राब हुई है.

हालांकि बीते दो सालों में भारतीय बाज़ार में उल्लेखनीय उछाल आया है. लेकिन सर्वे के नतीजे इसके ठीक उलट हैं.

साल 2017 में सिर्फ़ तीन प्रतिशत भारतीयों को लगा कि वो जीवन में कुछ बेहतर कर रहे हैं जबकि 2014 में यही आंकड़ा 17 प्रतिशत था.

यही नहीं बेरोज़गारी दर भी इस दौरान 3.53 प्रतिशत से बढ़कर 4.80 प्रतिशत हो गई है.

फ़ोर्ब्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मोदी ने स्थिर आर्थिक और राजनीतिक माहौल रखा है, कर सुधार लागू किए हैं, भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी है. ऐसी नीतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था बाकी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर रही है.

यही नहीं इससे देश में व्यापार के लिए भी हालात बेहतर हुए हैं और मुद्रास्फिति में कमी आई है.

साल 2017 में भारत दुनिया की चौथी सबसे तेज़ी से बढञती अर्थव्यवस्था बन गया है.

बावजूद इसके मोदी प्रशासन की नीतियों का अभी आम लोगों के जीवन में असर दिखना बाकी है.

आम परिवारों की आमदनी में कोई खास बढ़ौत्तरी नहीं हुई है और यह अभी भी 17400 रुपए महीना ही है.

यही नहीं कमकुशल मज़दूरों की औसतन आय  साल 2014 में 13300 रुपए से गिरकर 10300 रुपए प्रति महीना हो गई है. यानी जो पहले से गरीब हैं वो और गरीब हो रहे हैं.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय स्विट्ज़रलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम में हिस्सा ले रहे हैं.

भारतीय प्रधानमंत्री वहां दुनिया को भारतीय अर्थव्यवस्था की ताक़त दिखाने के लिए गए हैं.

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