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और अपने पिता को नहीं बचा सका एक ग़रीब मासूम

तर्कसंगत

January 24, 2018

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उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में बीते महीने दबंगों के हाथों पिटे लालजीत ने अस्पताल में दम तोड़ दिया है. उनके बेटे जगमोहन की अपनी पिता की जान बचानों के लिए की गई मशक्कत सोशल मीडिया के बाद मीडिया में भी सुर्खी बनी थी.

बीते महीने पिटाई के बाद जब लालजीत सिंह को अस्पताल में भर्ती कराया गया था तब ब्लड न होने की वजह से समय पर उनका ऑपरेशन नहीं हो पाया था.

लालजीत के नाबालिग मासूम बेटे जगमोहन ने लोगों से अपने पिता को ब्लड देने के लिए गुहार लगाई थी. मासूम बच्चे ने अस्पताल के बाहर ब्लड की भीख भी मांगी थी.

स्थानीय मीडिया में रिपोर्ट प्रकाशित होने और सोशल मीडिया पर इस बारे में पोस्ट किए जाने के बाद शहर के कई सामाजिक संगठन लालजीत की मदद के लिए आगे आए थे और उनके लिए ब्लड का इंतेज़ाम हो सका था.

शाहजहांपुर के ज़िलाधिकारी ने भी घटना का संज्ञान लिया था और अस्पताल से उचित इलाज की व्यवस्था करने के लिए कहा था.

लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी लालजीत की जान नहीं बचाई जा सकी और मंगलवार को उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया.

लालजीत की मौत के बाद एक बार फिर अस्पताल प्रशासन का शर्मनाक रवैया सामने आया. शव को पोस्टमार्टम हाऊस ले जाने के लिए एंबुलेंस मुहैया नहीं कराई गई.

मासूम जगमोहन पहले अपने पिता को इलाज दिलाने के लिए मशक्कत कर रहा था. अब पिता की मौत के बाद उसके सामने हत्यारों को सज़ा दिलाने की चुनौती है.

शर्मनाक बात ये है कि इस पूरी कवायद में ये बच्चा अकेला पड़ गया है. कुछ समाजसेवियों के अलावा कोई उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया है.

मीडिया से बात करते हुए जगमोहन ने कहा था कि अगर स्थानीय पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती तो उसके पिता पर हमला ही नहीं हुआ होता.

पहले ये परिवार ख़राब क़ानूव व्यवस्था का शिकार हुआ और उसे सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल सका.

हमले के बाद घायल लालजीत को जब अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वो वहां अस्पताल प्रशासन के रवैये का शिकार हो गया.

जिन लालजीत की जान आसानी से बचाई जा सकती थी उन्होंने आख़िरकार दम तोड़ दिया. मासूम जगमोहन अब इस जग में अकेला पड़ गया है.

(ये रिपोर्ट हमें शाहजहांपुर से अनूप कुमार ने भेजी है.)

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