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पद्मावतः विवाद जारी, चंडीगढ़ में बस में आग लगाई, राजस्थान में हाइवे जाम

तर्कसंगत

January 24, 2018

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फ़िल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली के अपनी फ़िल्म को राजपूत संगठनों को दिखाने के बावजूद फ़िल्म के ख़िलाफ़ गुस्सा जारी है.

सुप्रीम कोर्ट ने भले ही पूरे देश में फ़िल्म की रिलीज़ को मंज़ूरी दे दी हो लेकिन राजपूत संगठनों ने अपना विरोध समाप्त नहीं किया है.

फ़िल्म पद्मावत गुरुवार को देशभर में रिलीज होनी है. रिलीज़ से पहले राजपूत संगठनों का विरोध भी तेज़ हो गया है.

हरियाणा के गुणगांव में प्रदर्शनकारियों ने एक बस को आग लगा दी है. गुजरात के अहमदाबाद में भी वाहनों में आग लगाई गई है.

हाइवे पर टायर जलाकर जाम भी लगा दिया गया है.

अहतियात के तौर पर चंडीगढ़ और गुड़गांव समेत हरियाणा के चार शहरों में धारा 144 लगा दी गई है.

वहीं करणी सेना के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी का अभी भी कहना है कि वो फ़िल्म को देशभर में रिलीज़ नहीं होने देंगे.

महाराष्ट्र में भी फ़िल्म के ख़िलाफ़ कई जगह तोड़फोड़ की गई है जिसके बाद पुलिस ने क़रीब तीस उपद्रवियों को हिरासत में लिया है.

वहीं फ़िल्म के बढ़ते विरोध के कारण बुधवार को चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक किले को भी पर्यटकों के लिए बंद रखा गया है.

वहीं प्रदर्शनकारियों ने निम्बाहेड़ा जगह पर टायर जलाकर दिल्लीजयपुर हाईवे भी जाम कर दिया.

इसी बीच सिनेमा मालिकों ने गृहमंत्रालय को पत्र लिखकर फ़िल्म की रिलीज़ के बाद से थिएटरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पुख़्ता करने की मांग की है.

क्या है विवाद

राजस्थान में करणी सेना, हिंदूवादी संगठनों और बीजेपी के कई नेताओं ने फ़िल्म पर इतिहास से छेड़छाड़ करने के आरोप लगाए हैं.

राजपूत करणी सेना का आरोप है कि फ़िल्म में दिल्ली के सुल्तान रहे अलाउद्दीन खिलजी और राजपूत रानी पद्मिनी के बीच लव सीन फ़िल्माया गया है जो रानी पद्मिनी का अपमान है.

वहीं जिन पत्रकारों ने फ़िल्म देखी है उनका कहना है कि फ़िल्म में ऐसा कोई सीन नहीं है.

स्वयं संजय लीला भंसाली कह चुके हैं कि फ़िल्म में ऐसा कोई सीन नहीं हैं.

कुछ संपादकों का ये भी कहना है कि फ़िल्म में राजपूतों की मर्यादा का बखान किया गया है और अलाउद्दीन खिलजी को एक क्रूर शासक के तौर पर दिखाया गया है.

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