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वो घर जहां आठ महीने की बच्ची का बलात्कार हुआ

तर्कसंगत

February 7, 2018

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पूनम कौशल की रिपोर्ट

पश्चिमी दिल्ली की मिश्रित आबादी वाली कॉलोनी के उजाड़ पड़े पार्क से संकरी गली एक बेहद छोटे घर तक पहुंचती हैं.

शुरू होते ही ख़त्म हो जाने वाले इस घर तक पहुंचने में हमें कोई ख़ास मशक़्क़त नहीं करनी पड़ी.

हमने मकान का नंबर बताया तो लोगों ने कहा- वही घर जहां बच्ची का रेप हुआ है.

घर के बाहर खड़ी एक युवती ने दबी आवाज़ में बताया कि इसी घर के ऊपर वाले कमरे में वो दरिंदगी हुई थी.

वो अभियुक्त को बचपन से जानती थी. वो उसके लिए मोहल्ले का वो भाई था जिसने कभी उसे नज़र उठाकर नहीं देखा था.

वो  कहती है, यक़ीन करना मुश्किल है कि वो ऐसा कर सकते हैं. इस गली के हर घर का दरवाज़ा खुला था लेकिन वो घर बंद. यहां रहने वालों ने ख़ुद को बाहरी दुनिया से काट लिया था.

कई बार दस्तक देने पर बेहद कमज़ोर और परेशान दिख रही एक युवती ने दरवाज़ा खोला.

शुरू होते ही ख़त्म हो गए इस घर में एक अबोध बच्चा ज़मीन पर खेल रहा है. हमारे भीतर आने के बाद उसकी दादी उसे गोद में उठा कर भीतर चलीं गईं.

इस 9 महीने के बच्चे के पिता जेल में हैं. उन पर अपनी 8 महीने की चचेरी बहन से बलात्कार का आरोप है.

अभियुक्त की बहन और मां के चेहरे पर सदमा साफ़ नज़र आता है. पिता खाट से लग गए हैं और मुंह चादर में छुपाए लेटे हैं.

किचन, जो घर का बरामदा भी है, की स्लैब पर एक नया मोबाइल फ़ोन रखा है जो अभियुक्त ने 26 जनवरी पर अपनी पत्नी के लिए ख़रीदा था. भीतर बंधी एक तार पर बच्चों के कपड़े सूख रहे हैं.

इसी बीच दो-तीन बच्चे ऊपरी माले से नीचे आकर खेलने लगते हैं. इसी घर में कुछ दिन पहले अपराध की ऐसी वारदात हुई है जिसने न सिर्फ़ देश बल्कि दुनिया को झकझोर दिया है.

आंखों में आंसू लिए अभियुक्त की मां  कहती हैं, “अगर मेरा बेटी दोषी है तो उसे ज़रूर सज़ा हो. लेकिन पूरे मामले की ठीक से जांच हो.”

वो कहती हैं,

“अब हमारे लिए मुंह छुपाने की जगह नहीं हैं. पता नहीं उसने क्यों ऐसा किया. हमारे लिए यक़ीन करना मुश्किल है कि हमारा बेटा ऐसा कुछ कर सकता है.”

अभियुक्त की बहन कहती है, “मेरे भाई पर कभी किसी तरह का कोई आरोप नहीं लगा. हां, वो नशा ज़रूर करता था और उस दिन भी उसने शायद नशा किया हो. जो कुछ हुआ ऊपर के कमरे में हुआ हमने कुछ नहीं देखा.”

अभियुक्त ने तीन साल पहले अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था. उसकी पत्नी कहती हैं, “हमारी ज़िंदगी ख़ुशहाल चल रही थी. हमारे बीच सबकुछ ठीक था. मैं नहीं मान सकती कि वो ऐसा करेंगे.”

वो कहती है,

“पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. जिस दिन ये घटना हुई वो बच्ची अपनी बहन के साथ ऊपर के कमरे में अकेली थी. मेरे पति ने मेरी दूसरी चाची सास से कई बार कहा कि उन्हें जाकर देख लो वो क्यों रो रही हैं. चाची ने कहा कि ये तो रोज़ ही रोती रहती हैं.”

दरअसल जिस बच्ची का बलात्कार हुआ है वो अभियुक्त के सगे चाचा की बेटी है. वो घर की दूसरी मंज़िल पर बने कमरे में रहते हैं. वो मज़दूरी करते हैं और उनकी पत्नी भी रोज़ दो से तीन घंटे के लिए दोनों बच्चियों को अकेला छोड़कर काम पर जाती हैं.

अभियुक्त इसी कमरे के ऊपर बने एक छोटे से टिनशेड में अपनी पत्नी के साथ रहता है. जिस समय ये कथित बलात्कार हुआ है उस समय बच्चियां कमरे में अकेली थीं.  अभियुक्त की एक बेटी भी थी जिसके छह  महीने की उम्र में ही मौत हो गई थी.

इसी बीच अभियुक्त के पिता जो परे मुंह करके सो रहे थे उठे और बोले, क्या करें बेटा इस बुढ़ापे में ये कलंक लगना था. लेकिन उन्हें अपनी बेटियों को इस तरह अकेले छोड़कर नहीं जाना चाहिए था.

वहीं अभियुक्त की पत्नी भी बार-बार ये बात कह रहीं थी कि कोई मां अपनी दूध पीती बच्चियों को छोड़कर कैसे जा सकती हैं. क्या पता कोई और भी आया हो?

आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें घटना के बारे में पुलिस के आने के बाद पता चला.

जिस कमरे में कथित बलात्कार हुआ वो अब बंद पड़ा है. घटना के बाद कमरे को देखने वालों का कहना है कि बिस्तर ख़ून से सना था.

उस मासूम बच्ची की छटपटाहट आसपास के लोगों के दिल में ख़ौफ़ बन गई है. यहां रहने वाले लोगों के भीतर अजीब सा डर है.

पड़ोस में रहने वाली एक नवविवाहिता कहती हैं, “जब एक बेटी अपने घर में ही सुरक्षित नहीं है तो फिर वो कहां सुरक्षित रह सकती है.”

एक दूसरी महिला कहती हैं, “सोचकर ही डर लगता है कि हमारे इतने पड़ोस में इतनी ख़ौफ़नाक़ वारदात हुई है. हमारे बच्चे भी गली में खेलते हैं. पहले वो बाहर पार्क तक जाते थे तो हमें डर लगता था. अब एक पल के लिए भी आंखों से ओझल होते हैं तो मन बेचैन हो उठता है.”

इसी गली में पिछले तीन दशकों से रह रही एक महिला कहती हैं, जो हुआ उसने इस इलाक़े को बदनाम कर दिया है. कोई सोच भी नहीं सकता कि ऐसा भी हो सकता है. आठ महीने की बच्ची होती ही कितनी है, दोनों हाथों में आ जाती है.

पास बैठे एक अधेड़ कहते हैं,

“पहले ऐसी घटनाएं होती थी तो लोग कहते थे कि लड़की को देखकर मन मचल गया होगा लेकिन आठ महीने की बच्ची पर कोई बुरी नज़र डाल भी कैसे सकता है?”

यहां रहने वाले लोगों ने अभियुक्त के परिवार से संपर्क काट लिया है और कुछ का तो ये भी कहना था कि वो चाहते हैं कि अभियुक्त का परिवार यहां से चला जाए.

वहीं मामले की जांच कर रही पुलिस अधिकारी ने बताया, “बच्ची को सबसे पहले उसकी मां ने ही ख़ून से लथपथ देखा था, वो तुरंत उसे लेकर पास के डॉक्टर के पास गईं थी जिसने उसे पुलिस के पास भेजा था. पुलिस ने तुरंत लड़की को अस्पताल पहुंचाया और एफ़आईआर दर्ज की.”

जाँच अधिकारी के मुताबिक अभियुक्त को गिरफ़्तार कर फोरेंसिक सबूत जुटा लिए गए हैं.

हालांकि उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि अभियुक्त पूछताछ में आरोप स्वीकार किया है या नहीं.

वहीं घटना के लगभग दो सप्ताह बाद भी बच्ची दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती है. बच्ची के परिवार को सरकारी की ओर से आर्थिक मदद मुहैया करायी गई है.

अस्पताल से बात करते हुए उसके पिता ने बताया, “अभी उसकी हालत तो ठीक है लेकिन डॉक्टरों ने अभी घर जाने के लिए नहीं कहा है.”

वो कहते हैं, कभी वो ठीक लगती है कभी उसकी अचानक तबियत बहुत ख़राब हो जाती है.

वो कहते हैं,

“कुछ महीने पहले मेरी तबियत ख़राब हुई थी जिसके बाद कुछ क़र्ज़ हो गया था. क़र्ज़ उतारने के लिए मेरी पत्नी को भी दूसरों के घर में जाकर काम करना पड़ा. हम दोनों मिलकर महीने में आठ-नौ हज़ार रुपए कमा लेते थे.”

वो कहते हैं, “क़र्ज़ नहीं होता तो पत्नी बच्चियों के पास ही रहती.”

राजधानी दिल्ली में हुई बलात्कार की इस घटना पर देश के नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अलावा संयुक्त राष्ट्र ने भी चिंता व्यक्त की है.

मनोवैज्ञानिक अपने तर्क दे रहे हैं लेकिन ये स्वीकार करना अब भी मुश्किल है कि कोई भाई अपनी आठ महीने की बहन के साथ बलात्कार कर सकता है.

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